Wednesday, October 20, 2010

चिंतन की मासिक पत्रिका-‘‘प्रगति वार्ता’’

पत्रिका: प्रगति वार्ता, अंक: अगस्त 2010, स्वरूप: मासिक, संपादक: सच्चिदानंद, पृष्ठ: 60, मूल्य: 20रू.(वार्षिक 240 रू.), ई मेल: pragativarta@yahoo.co.in , वेबसाईट/ब्लाॅग: उपलब्ध नहीं, फोन/मो. 06436.222467, सम्पर्क: प्रगति भवन, चैती दुर्गा स्थान, साहिबगंज 816.109 झारखण्ड
साहित्य चिंतन की प्रमुख पत्रिका प्रगति वार्ता का समीक्षित अंक में विविधतापूर्ण आलेखों का प्रकाशन किया गया है। इनमें प्रमुख हैं- गंगा और बनारस(अरविंद कुमार सिंह), लोक संस्कृति की लय है कजरी(कृष्ण कुमार यादव), आस्था-अनास्था(प्रभात दुबे) एवं सामाजिक चेतना के प्रबुद्ध(प्रो. यशवंत कुमार लक्ष्मण) शामिल हैं। व्यक्तित्व के अंतर्गत रामनिहाल गंुजन का लेख सर्वाधिक सुरूचिपूर्ण व पठनीय है। राम अधीर व देवेन्द्र कुमार देवेश की कविताएं अच्छी व समसामयिक हैं। यू.एस. तिवारी का संस्मरण मेरे गुरू हरिशंकर परसाई संस्मरण जैसा कहीं से नहीं लगता है। आज बहुत से लेखक व्यंग्य लिख रहे हैं। लेकिन पता नहीं उनके अनुसार व्यंग्य वे किसे मानते हैं? समझ से परे है। प्रगति वार्ता में भी जो व्यंग्य प्रकाशित किए गए हैं वे उस कोटि के व्यंग्य नहीं हैं जिन्हें अब तक पाठक पढ़ता रहा है। पत्रिका की अन्य रचनाएं, समीक्षाएं आदि भी ठीक ठाक हैं।

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