Tuesday, October 26, 2010

नारी चेतना की प्रगतिशील पत्रिका-‘नारी अस्मिता’

पत्रिका: नारी अस्मिता, अंक: जून-नबम्बर 2010, स्वरूप: त्रैमासिक, संपादक: डाॅ. रचना निगम, पृष्ठ: 56, मूल्य: 25रू.(वार्षिक 100 रू.), ई मेल: , वेबसाईट/ब्लाॅग: , फोन/मो. उपलब्ध नहीं, सम्पर्क: 15, गोयागेट सोसायटी, शक्ति अपार्टमेंट, बी-ब्लाक, द्वितीय तल, एस/3, प्रतापनगर वडोदरा 390.004 गुजरात
देश भर में नारी चेतना जाग्रत करने के लिए प्रयासरत पत्रिका का समीक्षित अंक अनेक पठनीय आलेखों से युक्त है। अंक में रूखसाना सिद्दकी, श्रीमती रेनू सक्सेना, डाॅ. शकुन्तला कालरा, मोहिनी राजदान, पूनम गुजराती व अनीता पारीख के लेख नारी सशक्तिकरण के विचार को अभिव्यक्ति प्रदान करते हैं। सभी कहानियां आज के समाज व उसमें महिला की लगातार बदलती भूमिका पर गंभीरतापूर्वक प्रकाश डालती है। इसे कहानियों शुरूआत(संतोष श्रीवास्तव), तुम्हारा अमि(अनुभव शर्मा ऐनी), जब जागो तभी सवेरा(नीलिमा टिक्कू) व हादसे के बाद(मुन्नूलाल) में महसूस किया जा सकता है। वीणापांणी जोशी, सूर्यकांत पाण्डेय, जयश्री राय की कविताएं नयापन लिए हुए हैं। लघुकथाओं में कुछ भी नया नहीं है। विचारमंच के अंतर्गत आयोजित चर्चा में आत्महत्या विषय पर विचार किया गया है। इस पर पत्रिका द्वारा आयोजित परिचर्चा में कुछ अच्छे विचार सामने आते हैं। पत्रिका की अन्य रचनाएं, स्तंभ व समाचार आदि भी प्रभावित करते हैं।

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