Friday, October 22, 2010

माक्र्स की क्रांतिगंध बनाम गांधी की शान्ति गंध(संपादकीय)-‘‘समावर्तन’’

पत्रिका:समावर्तन, अंक: अक्टूबर 2010, स्वरूप: मासिक, संपादक: रमेश दवे, मुकेश वर्मा, पृष्ठ: 90, मूल्य: 25रू.(वार्षिक 250 रू.), ई मेल: samavartan@yahoo.com , वेबसाईट/ब्लाॅग: उपलब्ध नहीं, फोन/मो. 0734.2524457, सम्पर्क: माधवी 129, दशहरा मैदान, उज्जैन म.प्र.
साहित्य एवं नाटकों के लिए समर्पित पत्रिका के इस अंक में ख्यात कवि राजेश जोशी व प्रसिद्ध चित्रकार विष्णु चिंचालकर पर एकाग्र है। अंक में कवि राजेश जोशी के समग्र व्यक्तित्व व उनके जीवन संघर्ष पर गंभीर लेखों का प्रकाशन किया गया है। इनमें संपादक रमेश दवे, केदार नाथ सिंह, सुधीर रंजन सिंह के लेख प्रमुख ध्यान देने योग्य हैं। उर्मिला शिरीष व विजय कुमार से उनकी बातचीत साहित्य का गहन गंभीर विश्लेषण करती है। निरंजन श्रोत्रिय की कवि अमित मनोज की कुछ चुनी हुई कविताएं, सत्यमोहन शर्मा, सदाशिव कौतुक, व कुमार सुरेश की कविताएं अच्छी है। सतीश श्रोत्रिय व सुरेश शर्मा की लघुकथाएं प्रभावित करती हैं। चंद्रभान राही की कहानी ‘बेटा’ का शिल्प व कनक तिवारी का आलेख प्रभावित करते हंै। विष्णु चिंचालकर पर सूर्यकांत नागर, प्रभु जोशी, दिलीप विष्णुपंत, शाहिद मिर्जा के लेख विष्णु जी की कला का संतुलित व संश्लेषित विश्लेषण करते हैं। पिलकेन्द्र अरोड़ा, राग तेलंग, प्रेम शशांक व रमेश खत्री के लेख व विनय उपाध्याय का सतंीा अन्य पठनीय रचनाएं हैं।

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