Tuesday, September 7, 2010

ग़ज़ल समय के लिए सोचती है-‘समय के साखी’

पत्रिका: समय के साखी, अंक: जून-जुलाई10, स्वरूप: मासिक, संपादकः डाॅ. आरती, पृष्ठ: 66, मूल्य:20रू.(.वार्षिक 220रू.), ई मेल: samaysakhi@gmail.com , वेबसाईट/ब्लाॅग: http://www.samaykesakhi.in/ , फोन/मो. 9713035330, सम्पर्क: बी-308, सोनिया गांधी काम्पलेक्स, हजेला हाॅस्पिटल के पास, भोपाल म.प्र. पत्रिका का समीक्षित अंक ग़ज़ल विधा पर एकाग्र है। अंक में विशेष रूप से दुष्यंत जी की ग़ज़लांे व उनपर एकाग्र रचनाओं का प्रकाशन किया गया है। उनकी ग़ज़लें, पत्र, संस्मरण तथा उनपर एकाग्र आलेख उपयोगी व शोधरत छात्रों के लिए मार्गदर्शक हैं। किशन तिवारी, मोहन सगोरिया, मधु शुक्ला, अनुशपन उपयोगी हैं। ज़हीर कुरेशी पर एकग्र खण्ड व उनसे पारितोष मालवीय की चर्चा अच्छी बन पड़ी है। जीवन सिंह, शिवशंकर मिश्र, राजेन्द्र वर्मा व मेयार सनेही ने बहुत ही बारीकी से आलेखों में ज़हीर कुरेशी के मार्फत ग़ज़ल विधा के अतीत वर्तमान व भविष्य पर विचार किया है। पत्रिका की अन्य रचनाएं, आलेख भी प्रभावित करते हंै।

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