Sunday, August 29, 2010

‘शब्दशिल्पियों के आसपास’

पत्रिका: आसपास, अंक:अगस्त 2010, स्वरूप: मासिक, संपादक: राजुरकर राज, पृष्ठ: 24, मूल्य:5रू.(.वार्षिक 60रू.), ई मेल: shabdashilpi@yahoo.com , वेबसाईट/ब्लाॅग: http://www.dharohar.net/ , फोन/मो. 0755.2772061, सम्पर्क: एच-3, उद्धवदास मेहता परिसर, नेहरू नगर,भोपाल म.प्र.
रचनाकर्मियों की संवाद पत्रिका आसपास के इस अंक में उपयोगी व साहित्यपे्रमियों के संवाद हेतु जानकारी का प्रकाशन किया गया है। अंक में विभूतिनारायण जी के विवादास्पद प्रकरण को प्रकाशित किया गया है। इसके अंतर्गत ख्यात व्यंग्यकार एवं व्यंग्ययात्रा के संपादक पे्रम जनमेजय के विचार भी उपयोगी हैं। अन्य समाचारों मेें साहित्य अकादमी के नए प्रकल्प, जब्बार ढाकवाला की मृत्यु पर उठे सवाल, तस्लीमा को छोड़ना होगा भारत सहित अन्य समाचारों का प्रकाशन किया गया है। पत्रिका सभी समाचार अन्य पत्रिकाओं से साभार लेकर प्रकाशित करती है। साहित्य अकादमी के निदेशक डाॅ. त्रिभुवनाथ शुक्ल से बातचीत तथा गूगल की हिंदी सर्च सेवा सुधरने का समाचार हिंदी साहित्य के प्रति लोगों की उत्सुकता की जानकारी देता है। माणिक वर्मा से संबंधित समाचार व लीलाधर मण्डलोई, हेमंत शेष, माणिक वर्मा, ममता कालिया एवं चित्रांश को मिले सम्मान के समाचार जानकर प्रसन्नता हुई। आसपास ने एनएचडीसी लि. के स्थापना दिवस समारोह का समाचार विस्तार के साथ प्रकाशित किया है। पत्रिका के अन्य स्थायी स्तंभ, समाचार, हलचल आदि भी प्रभावित कर संवाद स्थापित करने में सफल रहे हैं।

3 comments:

  1. सही जानकारी जी धन्यवाद

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  2. इतनी फालतू पत्रिका पर टिप्पणी कोई फुरसतिया ही दे सकता है.

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