Monday, May 24, 2010

उनके बिना उनके साथ-‘शुभ तारिका’

पत्रिका: शुभ तारिका, अंक: मई2010, स्वरूप: मासिक, संपादक: उर्मि कृष्ण, पृष्ठ: 92, मूल्य:25रू.यह अंक(वार्षिक 120रू.), ई मेल: not avilable , वेबसाईट/ब्लाॅग: उपलब्ध नहीं , फोन/मो. 0171.2610483, सम्पर्क: कृष्णदीप , ए-47, शास्त्री कालोनी, अम्बाला छावनी हरियाणा
पत्रिका शुभ तारिका का समीक्षित अंक ख्यात कथाकार, साहित्यकार लेखक व विचारक महाराज कृष्ण जी को समर्पित है। उन पर पत्रिका में गंभीरतापूर्वक आलेख लिखे गए हैं। इनमें कमलेश ठाकुर, आशा शैली, प्रबोध कुमार गोविल, नरेन्द्र कौर छाबड़ा, डाॅ. रूखसाना सिद्दकी, रमेश प्रसून, ज्ञाननंद मिश्र, दिलीप भाटिया, पंकज शर्मा, किशन लाल शर्मा, कमलेश भारतीय, प्रदुमन पासवान अमित, इंदिरा किसलय, विजया गुप्ता, प्रमीला गुप्ता, शराफत अली खान, बालाजी तिवारी, प्रताप अरनोट, अरूण कुमार भट्ट, हेमंत यादव शशि, गीता जैन, सुरेन्द्र प्रसाद गिरि, मंजु चन्द्रमोहन नागोरी, लेखराम शर्मा, सुरेन्द्र गुप्त, स्नेह बंसल, डाॅ. चन्द्र भूषणमिश्र, अरशाद नकवी, देशपाल सिंह सेंगर, सुभाष बंसल, उर्मि कृष्ण प्रमुख हैं। पत्रिका में उनकी ख्यात रचनाओं सहित कुछ प्रतिनिधि रचनाओं का समावेश किया गया है। इनमें धर्मनिरपेक्षता का महाकुंभ, स्वर्ग और नर्क, विद्वता के सााि विनम्रता तथा कहानी विधा पर आलोचनात्मक समीक्षात्मक आलेख नई कहानी: कुछ और नये लेखकों के लिए विशेष रूप से उपयोगी व संग्रह योग्य हैं। पत्रिका की अन्य रचनाएं व समीक्षाएं, कविताएं भी प्रभावित करती हैं।

4 comments:

  1. बेशक अच्छी पत्रिका है लेकिन इनकी डाक व्यवस्था इतनी असंतोषजनक है कि बस पूछिये मत। मैं पिछले कुछ सालों में कई बार शुभ तारिका की सालाना ग्राहक बन चुकी हूं लेकिन हर बार एक-दो अंक मिलते हैं और उसके बाद पत्रिका मिलनी बंद हो जाती है। चिट्ठी लिखते रहिये कोई फायदा। मैं पत्रिका प्रबंधन की नीयत पर सवाल नही उठा रही हूं लेकिन व्यवस्था ठीक नहीं है।

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  2. Mein takreeban ek saal se Shubh Tarika ka sadasya hoon. Mujhe saari patrikayen niyamit roop se har mahine samay par mil rahi hai. Kahin koi shikayat nahi.

    Mere mutabik Shubh Tarika apni vishayvastu ki vajay se Sarvshresth Patrika ka khitaab paane ki yogyata rakhti hai. Prabhu se prarthana hai ki Adarniya Urmi Krishna ji ke sir par yoonhi apni aashishon ka haath banaye rakhen.
    Vikas arora (Rewari, Haryana)

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  3. is patrika ka javaab nahi yeh lag bhag 40 saal se regular pablish ho rhai hai...kabhi bhi late nahi hoti

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