Thursday, April 1, 2010

साहित्य की मुक्त कंठ गाथा-‘सृजन गाथा’

पत्रिका: सृजनगाथा(ई-पत्रिका), अंक: मार्च10, स्वरूप: मासिक, संपादक: जयप्रकाश मानस, पृष्ठ: आॅनलाईन उपलब्ध, मूल्य अमूल्य(वार्षिकः दुर्लभ), ई मेल: srijangatha@gmail.com , वेबसाईट/ब्लाॅग: http://www.srijangatha.com/ , साहित्य संस्कृति एवं भाषा का वैश्विक मंच के इस नए निखरे रूप ने बहुत अधिक प्रभावित किया। पत्रिका का प्रथम आलेख भारतीय प्रादेशिक साहित्य के जर्मन अनुवाद की जानकारी देता है। सूरज प्रकाश की कहानी अल्बर्ट आज के परिवेश की एक अच्छी सार्थक रचना है। समाचार गौरीनाथ को खगेन्द्र ठाकुर का कानूनी नोटिस साहित्य जगत की हलचल से रूबरू कराता है। हेमंत शेष को वर्ष .09 का बिहारी पुरस्कार व पंजाबी कवि डाॅ. जगतार के देहावसान के समाचार अभी तक कहीं पढ़ने में नहीं आए हैं। ‘वाज इट अ ड्रीम’(फ्रांसिसी कहानी) का द्विजेन्द्र जी द्वारा किया गया अनुवाद कथारस से पाठक को बांधे रखने में सफल रहा हैै। डाॅ. अभिजात का आत्मकथ्य ‘इश्क ने लिखना सिखाया’ व मनोज सिंह का मूल्यांकन ‘रूसी साहित्य में गूढ़ रहस्यवाद का आगमन’ समीक्षा से बढ़कर बेहतर विश्लेषण है। संजय पुरोहित की कहानी ‘फियादीन’ न्यूज चेनलों पर बढ़ते बाजारवाद व उससे उत्पन्न खतरों के प्रति आगाह करती हे। संपादक जयप्रकाश मानस जी की बात वर्तमान समाज में व्याप्त घृणा व व्यवस्था के प्रति जन आक्रोश की गहन पड़ताल करता है। पत्रिका के निखरे सुंदर रूप को हार्दिक बधाई।

1 comment:

  1. आपको मैंने मेल पर कुछ लिखा था ,मिला या नही ?

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