Sunday, March 14, 2010

कहानी पर एकाग्र-‘साहित्य अमृत’

पत्रिका: साहित्य अमृत, अंक: फरवरी10, स्वरूप: मासिक, संपादक: त्रिलोकीनाथ चतुर्वेदी, पृष्ठ: 162, मूल्य:50रू.(वार्षिकः 200), ई मेल: prabhat1@vsnl.com , वेबसाईट: उपलब्ध नहीं, फोन/मो. (011)23289777, सम्पर्क: 4/19, आसफ अली रोड़, नई दिल्ली 110.002
ख्यात पत्रिका साहित्य अमृत का समीक्षित अंक कहानी विशेषांक है। अंक में ख्यात कथाकारों के साथ साथ वर्तमान में कथा साहित्य पर गंभीर चिंतन कर रहे साहित्यकारों के विचारों को भी स्थान दिया गया है। प्रकाशित कहानियों में - देवी(सूर्यकांत त्रिपाठी निराला), भरम(विजयदान देथा), दिन(महीप सिंह), सहस्त्र पूतों वाली(मृदुला सिन्हा), मोहलत(गोविंद मिश्र), शुभ विवाह(ऋचा शुक्ल), घाटे का भविष्य(से.रा. यात्री) की कहानियों को स्थान दिया गया है। इन कहानियों में तत्कालीन समाज की बदलती मान्यताओं परंपराओं को कथाकारों ने प्रमुखता से स्थान दिया है। अन्य कहानियों में गवाह(कुसुम अंसल), बेड़ियां(सीतेश आलोक), हीरा जन्म अनमोल था(सूर्यबाला), अपनी अपनी रणनीति(प्रदीप पंत), स्नेक प्लांट(सुर्दशन वशिष्ठ) कथा की प्रवाहता के कारण पठनीय व मनन योग्य हैं। मन मोहने का मूल्य(सुषमा मुनीन्द्र), मदद(अमर गोस्वामी), निर्णय उस रात का(देवव्रत जोशी), सरगम(उर्मिला शिरीष) हादसा(रूपसिंह चंदेल) एवं जनकपुर का अवसान(शुभदा मिश्र) अपनी शैली व विषय वस्तु की विशिष्टता के कारण याद रखने योग्य हैं। अन्य रचनाओं में छाया दर्शन(सुनील गंगोपाध्याय) तथा संस्मरण अवसान एक कलमजीवी लेखनी का(मृदुला सिन्हा) में पाठकों के विचार करने हेतु काफी कुछ सामग्री का समावेश किया गया है। अन्य स्थायी स्तंभ, रचनाएं, समाचार आदि भी पत्रिका के इस अंक को संग्रह योग्य बनाते हैं।

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