Saturday, February 27, 2010

एंहचली, हार और झेड़े-‘हिमप्रस्थ’

पत्रिका: हिमप्रस्थ, अंक: जनवरी.10, स्वरूप: मासिक, संपादक: रणजीत सिंह राणा, पृष्ठ: 56, मूल्य: 5रू.(वार्षिकः 50), ई मेल: himprasthahp@gmail.com , वेबसाईट: उपलब्ध नहीं , फोन/मो. उपलब्ध नहीं, सम्पर्क: हिमाचल प्रदेश प्रिटिंग प्रेस परिसर, घोड़ा चैकी, शिमला-5
हिमप्रदेश से निकलने वाली यह पत्रिका हर अंक में विशिष्ट आलेखों का प्रकाशन करती है। इस अंक के आलेखों में - अमृता शेरगिल और शिमला का आकर्षण(सुदर्शन वशिष्ट), श्रव्य कथाओं की किस्सागोई(श्रीनिवास श्रीकांत), सांस्कृतिक समन्वय केे लिए ग़़ज़ल(डाॅ. तारादत्त निर्विरोध) एवं राजयोग और संगीत(डाॅ. जीवराज शर्मा) प्रमुख हैं। इस अंक में दो समसामयिक कहानियां यह भी सत्य है(डाॅ. सरला अग्रवाल) तथा साॅरी(देवांशु पाल) प्रकाशित की गई है। लघुकथाओं में जितेन्द्र कुमार की प्यास आकर्षक व सार्थक रचना है। नरेश कुमार उदास , डाॅ. दिनेश चमौला ‘शैलेश’, प्रियंका भारद्वाज एंव पीयुष गुलेरी की कविताएं आज के समय में परिवर्तन की इच्छुक दिखाई देती है। पत्रिका की अन्य रचनाएं व्यंग्य तथा समीक्षाएं भी इसे सार्थक साहित्य की अच्छी पत्रिका बनाते हैं।

1 comment:

  1. होली की खुब सारी शुभकामनाये आप ओर आप के परिवार को.

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