Monday, February 8, 2010

उत्तम साहित्य की ‘मैसूर प्रचार परिषद पत्रिका’

पत्रिका-मैसूर हिंदी प्रचार परिषद पत्रिका, अंक-जनवरी10, स्वरूप-मासिक, संपादक-डाॅ. बी. रामसंजीवैया, पृष्ठ-48, मूल्य-5रू.(वार्षिक 50रू.), फोनः (080)23404892, ई मेलः brsmhpp@yahoo.co.in ,सम्पर्क-मैसूर हिंदी प्रचार परिषद, 58, वेस्ट आॅफ कार्ड रोड़, राजाजी नगर, बेंगलूर 560010 कर्नाटक पत्रिका का समीक्षित अंक राजभाषा से संबंधित सामग्री से परिपूर्ण है। अंक में भाषा से संबंधित कुछ उपयोगी आलेखों का प्रकाशन किया गया है। इनमें प्रमुख हैं- राजभाषा हिंदी और संसदीय राजभाषा समिति(कृष्ण कुमार ग्रोवर), भाषायी दासता सेे मुक्ति कैसे मिले(मित्रेश कुमार गुप्त), प्रयोजनामूलक हिंदी(ए.एम. रामचंद्र), प्रयोजनामूलक हिंदी के विविध आयाम(राकेश कुमार शर्मा), प्रयोजनामूलक हिंदी खण्ड.01(प्रो. बी. वै. ललिताम्बा)। अन्य रचनाओं में प्रगतिवादी काव्य में व्यक्त प्रवृत्तिमार्गी जीवन दर्शन(संतोष कुमार लक्ष्मण यशवंतकर), कन्नड़ साहित्य(डाॅ. टी. जी. प्रभाशंकर ‘पे्रमी’) प्रभावित करती है। देवेन्द्र कुमार मिश्र की कहानी दीदी तथा अखिलेश शुक्ल एवं बी. गोविंद शेनाय की लघुकथा भी पत्रिका को स्मृद्ध बनाती है। हितेश कुमार शर्मा, प्रदीप निगम एवं गया प्रसाद विश्वकर्मा की कविता अपनी नवीनता के कारण ध्यान देने योग्य हैं।

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