Saturday, November 28, 2009

क्या आपने ‘नया ज्ञानोदय’ का प्रेम महाविशेषांक 05 पढ़ा है?

पत्रिका-नया ज्ञानोदय, अंक-नवम्बर.09, स्वरूप-मासिक, संपादक-रवीन्द्र कालिया, पृष्ठ-144, मूल्य-35रू इस अंक का मूल्य., (वार्षिक 300रू.), सम्पर्क-भारतीय ज्ञानपीठ, 18 इन्टीट्यूशनल एरिया, लोधी रोड़, नई दिल्ली फोनः (011)24626467, ईमेलः janpith@satyam.net.in
पत्रिका नया ज्ञानोदय का नवम्बर 09 अंक महाविशेषांक 05 है। इस अंक में विशेष रूप से पे्रम के लोक पक्ष पर पठ्नीय व संग्रह योग्य सामग्री का प्रकाशन किया गया है। अंक हर तरह से बेजोड़ है व सामग्री का स्तर अंतर्राष्ट्रीय स्तर का है। विजय मोहन सिंह ने टाॅल्सटाॅय के विश्व प्रसिद्ध उपन्यास ‘अन्ना केरेनिना’ की संरचना व उसके सृजन पर उपयोगी आलेख लिखा है। ‘अवधि साहित्य में प्रणय प्रसंग के अंतर्गत’ विद्याविन्दु सिंह ने विस्तार से लिखा है। मीनाक्षी जोशी ने विद्यापति की प्रेम संबंधी मान्यताओं पर नए सिरे से विचार किया है। सुशील कुमार फुल्ल ने पे्रम कथाओं तथा उसके स्वरूप पर गंभीर विश्लेषण किया है। विजय दान देथा का आलेख राजस्थान व गुजरात में प्रचलित प्रेम की लोक परंपराओं पर प्रकाश डालता है। लोकरंगी प्रेमकथाओं के अंतर्गत प्राचीन लोक प्रचलित कथाओं को ख्यात लेखकों ने नए स्वरूप में इस तरह से प्रस्तुत किया है कि उनकी मौलिकता बनी हुई है तथा रोचकता में अच्छी खासी वृद्धि हुई है। निमोंही(ममता कालिया), महुआ घटवारिन(पंकज सुबीर) एवं नल दमयंती(रांगेय राघव) कहानियां बार बार पढ़ने योग्य हैं। इन रचनाओं का स्वरूप व कथ्य लेखकों ने इस तरह से रचा है कि वह पाठक को बांधे रखता है। लोक कथा के अंतर्गत कुणाल सिंह, ईशान अग्निहोत्री, सुशील सिद्धार्थ व रणेन्द्र ने पुर्नलेखन किया है। लेकिन कहीं कहीं कथाओं पर लेखकीय दृष्टिकोण व विचारधारा का अनावश्यक प्रभाव दिखाई देता है। अनुज, बीरभद्र तलवार, हिमांशु शेखर झा, परदेशी राम वर्मा, भारती राणे, देवव्रत जोशी व शरद पगारे की ऐतिहासिक प्रेमकथा ‘औरंगजेब की प्रेमिका’ मंे पाठक के मनोरंजन के साथ साथ नए सिरे से इन कथाओं की जानकारी होगी। पत्रिका की अन्य रचनाएं व सामग्री भी इसके हर अंक के समान उपयोगी व पठ्नीय है। यह महाविशेषांक हर हिंदी प्रेमी के पढ़ने व संजोकर रखने योग्य है।

Friday, November 27, 2009

हिंद स्वराज पर विशेष सामग्री-वागर्थ

पत्रिका-वागर्थ, अंक-नवम्बर.09, स्वरूप-मासिक, संपादक-डाॅ. विजय बहादुर सिंह, पृष्ठ-130, मूल्य-20रू.(वार्षिक 200रू.), सम्पर्क-भारतीय भाषा परिषद, 36ए, शेक्सपियर सरणि, कोलकाता 700.017 (भारत), फोनः(033)22879962, ई मेलः bbparishad@yahoo.co.in
वागर्थ का नवम्बर .09 अंक आंशिक रूप से हिंद स्वराज के सौ साल हेतु समर्पित है। धर्मपाल जी ने इस पर सार्थक तथा गंभीर चर्चा की है। पत्रिका के संपादक विजय बहादुर सिंह, सच्चितानंद सिंहा, गिरीश मिश्र, मैत्रेयी पुष्पा, काशीनाथ सिंह एवं अलका सरावगी के आलेख पाठकों को अदभुत् तथा स्तरीय सामग्री उपलब्ध कराते हैं। इस संदर्भ में पूर्व प्रधानमंत्री व चिंतक श्री विश्वनाथ प्रताप सिंह से रामपूजन सहाय की बातचीत हमारी वर्तमान स्थिति तथा भविष्य की तैयारी पर पर्याप्त प्रकाश डालती है। कनक तिवारी तथा मैनेजर पाण्डेय जी के आलेख हिंद स्वराज का सच बताते हुए इस विषय को पुनः प्रस्तुत करते दिखाई देते हैं। सभ्यता विकास और हिंद स्वराज पर विद्वान सुंदरलाल बहुगुणा से जार्ज जेम्स की बातचीत सहेज कर रखने योग्य है। ख्यात आलोचक लेखक कृष्ण दत्त पालीवाल का आलेख ‘कहिए कौन कुटिल खल कामी’ पढ़ने पर लगता है कि साहित्य जैसा समझा जाता है वैसा नहीं है पर जैसा दिखता है वैसा भी नहीं है। उसे समझने के लिए विशेष अध्ययन चिंतन मनन की आवश्यकता है। राधा वल्लभ त्रिपाठी का आलेख कविता में सत्ता के विरोध की परंपरा और महिषतकम्’ लेखक की वर्षो से की गई साहित्य साधना का सुफल है। बसंत त्रिपाठी, अजामिल, कालीप्रसाद जायसवाल एवं कुशेश्वर की कविताएं वर्तमान संदर्भो की कविताएं हैं। पत्रिका की अन्य रचनाएं व पत्र-समाचार आदि भी प्रभावशाली व पाठक के लिए अध्ययन की विशेष सामग्री है। पत्रिका के 172 वंे सहेजकर रखने योग्य संग्रहणीय अंक के लिए कथाचक्र परिवार की ओर से बधाई।

Thursday, November 26, 2009

क्या आपने ‘पंजाबी संस्कृति’ पत्रिका पढ़ी है?

पत्रिका-पंजाबी संस्कृति, अंक-अक्टूबर-दिसम्बर.09, स्वरूप-त्रैमासिक, प्रधान संपादक-डाॅ. राम आहूजा, पृष्ठ-64, मूल्य-20रू.(वार्षिक 200रू.), सम्पर्क-एन. 115, साउथ सिटी 1, गुड़गांव(हरियाणा), फोनः 01244227455, ईमेलः ram_ahuja@hotmail.com
पत्रिका के इस अंक में पाठकोपयोगी आलेखों को शामिल किया गया है। इनमें प्रमुख हैं- अशिष्टता(ओम प्रकाश बजाज), रिश्ते अनमोल हैं इन्हें सहेजे संवारें(नीतू पंजाबी) एवं क्या नशा सिर्फ अययाशी है। कहानियों में अपने पराए(अशफाक कादरी) तथा गुब्बारे(जसवंत सिंह विरदी) आज के समय व उससे जुड़ी मान्यताओं को लेकर चलती हुई दिखाई देती हैं। लघुकथाओं में पंकज शर्मा, डाॅ. रामनिवास मानव, श्याम सखा ‘श्याम’ एवं महावीर गोयल प्रभावशाली हैं। रमेश कुमार सोनी, श्रीमती उर्मिला मोंगा, आनंद दीवान, संजीवन मयंक, रामस्नेही लाल शर्मा, तिलकराज गोस्वामी, आशा सेली, अनिरूद्ध सिंहा एवं डाॅ. मालिनी गौतम की कविताएं उपयोगी व चिंतन योग्य हैं। पत्रिका की अन्य रचनाएं, समीक्षाएं व पत्र आदि भी प्रभावित करते हैं।

इससे अधिक और कहां मिलेगा-संदर्भ ‘समावर्तन’

पत्रिका-समावर्तन, अंक-नवम्बर.09, स्वरूप-मासिक, प्रधान संपादक-रमेश दवे, पृष्ठ-96, मूल्य-20रू.(वार्षिक 200रू.), सम्पर्क-माधवी 129, दशहरा मैदान, उज्जैन म.प्र. फोनः(0734)2524457
पत्रिका ने बहुत ही संुदर ढंग से प्रेमचंद व जैनेन्द्र के साहित्यिक अवदान पर विचार व्यक्त किए हैं। कमलकिशोर गोयनका, अश्विनी पाराशर के आलेख इन रचनाकारों पर नए सिरे से विचार करते दिखाई देते हैं। राजेन्द्र नामदेव, राम मेश्राम तथा सुरेश उजाला की कविताएं पत्रिका के स्तर में वृद्धि करती हैं। हिंद स्वराज पर विशेष सामग्री में पत्रिका के विविधतापूर्ण स्वरूप की झलक मिलती है। सच्चितानंद सिन्हा,मीनाक्षी जोशी, नंदकिशोर आचार्य, यशदेव शल्य, भगवान सिंह, सुधीर कुमार, कृष्ण गोपाल मिश्र, अनिरूद्ध उमठ, मनोज श्रीवास्तव एवं पद्मा शर्मा के आलेख स्वराज पर अपनी भावनाएं तथा दृष्टिकोण प्रगट करते में सफलज रहे हैं। विनय उपाध्याय की कपिल तिवारी से बातचीत जानकारी परक व नए पाठकों के लिए उपयोगी है। पत्रिका की अन्य रचनाएं व सामग्री पाठक का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करने में पूरी तरह सक्षम हैं।

Wednesday, November 25, 2009

राष्ट्रीय महत्व के आलेख और ‘हिमप्रस्थ’

पत्रिका-हिमप्रस्थ, अंक-अक्टूबर.09, स्वरूप-मासिक, संपादक-रणजीत सिंह राणा, पृष्ठ-60, मूल्य-5रू.(वार्षिक 50रू.), सम्पर्क-हिमाचल प्रदेश प्रिंटिंग प्रेस परिसर, घोड़ा चैकी, शिमला 5, ईमेलः himprasthahp@gmail.com
पत्रिका के इस अंक में राष्ट्रीय महत्व के महत्वपूर्ण आलेखों का प्रकाशन किया गया है। इनमें प्रमुख हैं-- रंग कर्मियों व सिने कलाकारों का शहर शिमला(सुदर्शन वशिष्ठ), दक्खिनी हिंदी एक विवेचन(कृपाशंकर सिंह), किन्नौर एक आकर्षक स्थल(रचना शर्मा), मगध की संस्कृति और लोकगीत(राजेन्द्र परदेसी) शामिल हैं। कहानियों में सुरेन्द्र ‘चंचल’ की कहानी तथा रामकुमार आत्रेय की लघुकथा विशेष रूप से प्रभावित करती है। निधि शर्मा, आशा कुमारी, यादवेन्द्र शर्मा, देशराज कमल एवं कुमारी प्रवीन की कविताएं भविष्य के प्रति आशा बंधती हैं। जसविंदर शर्मा के व्यंग्य सहित अन्य समीक्षाएं व रचनाएं भी अच्छी व पठ्नीय हैं।

Tuesday, November 24, 2009

विविधतापूर्ण साहित्य और ‘समय के साखी’

पत्रिका-समय के साखी, अंक-अक्टूबर.09, स्वरूप-मासिक, संपादक-डाॅ. आरती, पृष्ठ-60, मूल्य-20(वार्षिक 220रू.), सम्पर्क-बी-308, सोनिया गाॅधी काम्पलेक्स, हजेला हाॅस्प्टिल के पास, भोपाल म.प्र. फोनः 9713035330, ईमेलः samaysakhi@gmail.com
मध्यप्रदेश से प्रकाशित होने वाली प्रमुख साहित्यिक पत्रिका ‘समय के साखी’ के इस अंक में गंभीर व विचारपूर्ण रचनाओं को स्थान दिया गया है। रवि श्रीवास्तव का आलेख ‘आधुनिकता, उत्तर आधुनिकता और हम’ पाठकों को कुछ ऐसे प्रश्नों के उत्तर देता है जिन पर वे अब तक विचार करते रहे हैं। अमृता शेरगिल की कला यात्रा पर डाॅ. चक्रधर ने जो जानकारी दी है वह संग्रह योग्य है। एस.एस. पटैल द्वारा अनुवादित रचनाएं संबंधित रचनाकारों से परिचित कराने में कामयाब रही है। पुरस्कार के क्षेत्र में मचे हुए घमासन तथा उसमें गहरे तक धंसी हुई राजनीति पर राम मूर्ति यादव ने अपने आलेख में विचार व्यक्त किए हैं। सूर्यकांत नागर तथा रजनीकांत पाण्डेय की कविताएं एवं सुभाष शर्मा तथा लता अग्रवाल की कहानियां आज की समयसापेक्ष रचनाएं हैं। राधेलाल विजघावने व अशोक ‘आनन’ की कविताएं भी पठनीयता से भरपूर हैं। हरीलाल मिलन व राजीव नामदेव ‘रान ा लिधौरी’ की ग़ज़लें बेहतर बन पड़ी हैं। पत्रिका की अन्य रचनाएं, समीक्षाएं तथा समाचार व सामयिकी भी जानकारीपरक तथा उपयोगी हैं। पत्रिका के इस अच्छे अंक के लिए बधाई।

Monday, November 23, 2009

प्रभावशाली प्रस्तुतिकरण युक्त पत्रिका

पत्रिका-साहित्यांचल, अंक-अक्टूबर-दिसम्बर.09, स्वरूप-त्रैमासिक, प्रधान संपादक-सत्यनारायण व्यास मधुप, प्रबंध संपादक-रविकांत व्यास, पृष्ठ-64, मूल्य-15रू.(वार्षिक-100रू.दो वर्ष के लिए), सम्पर्क-रूकमणि निवास, 16ए, 14 बापूनगर, भीलवाड़ा राजस्थान, मो. 9460202938
पत्रिका का यह अंक अपने आकार से भी अधिक साहित्यिक सामग्री को संजोए हुए है। अंक में डाॅ. रीता सिंह, एस.एस. गंभीर, भरत व्यास, मुकेश चतुर्वेदी, समीर, अजय, रामस्नेहीलाल यायावर,कमलकिशोर शर्मा, यशोदानंदन श्रीवास्तव, त्रिलोक चंचल, गौरव नैथानी रामशंकर चंचल, रमेश सोबती, रामनारायण त्रिपाठी, दीनानाथ श्रीवास्तव तथा रचना गौड़ भारती की कविताओं को स्थान दिया गया है। कमलचंद वर्मा, शंकरलाल काबरा तथा सीताराम शर्मा के आलेख बहुत अच्छे बन पड़े हैं। पत्रिका की रूपरेखा तथा प्रस्तुतीकरण प्रभावशाली है।

आप भी सीखे ग़ज़ल लिखना--संदर्भ ‘ग़ज़ल के बहाने’

पत्रिका-ग़ज़ल के बहाने, अंक-04., स्वरूप-अनियतकालीन, संपादक-डाॅ. ‘दरवेश’ भारती, पृष्ठ-32, मूल्य-अनमोल, सम्पर्क-1341/17, चमेली मार्केट, रोहतक हरियाणा, मो. 09466831500 ई मेलः ghazalkebahane.darveshbharti@gmail.com
पत्रिका ग़ज़ल के बहाने को जब पहली बार डाक में देखा तब इस पर ध्यान नहीं दिया था। लेकिन पढ़ने पर लगा कि यह कोई ऐसी वैसी पत्रिका नहीं है। इसमें ग़ज़ल विधा पर गंभीरतापूर्वक विचार किया गया है। इस अंक में आर.पी. महारिश, अकील नोमानी, अनमोल शुक्ल, माणिक वर्मा, महेन्द्र हुमा, मुनव्वर अली, श्याम अंकुर, कौशल फरहत, नरेश निसार की ग़ज़लें बेहतर हैं। पत्रिका केवल ग़ज़ल प्रकाशित ही नहीं करती अपने पाठकों में ग़ज़ल के संस्कार भी डालती है। इसमें प्रकाशित आलेख ग़ज़ल कहने तथा लिखने की बारीकियों पर विचार करते हैं। इस विधा की पत्रिका की कमी पूरी करती हुई यह पत्रिका वास्तव में पढ़ने व सहेजने योग्य है। अच्छे अंक के लिए बधाई।

Sunday, November 22, 2009

भारतीय जनमानस के लिए साहित्य परिक्रमा

पत्रिका-साहित्य परिक्रमा, अंक-अक्टूबर-दिसम्बर.09, स्वरूप-त्रैमासिक, प्रबंध संपादक-जीतसिंह जीत, संपादक-मुरारीलाल गुप्त ‘सीतेश’, पृष्ठ-64, मूल्य-15रू.(वार्षिक-100रू.दो वर्ष के लिए), सम्पर्क-राष्ट्रोत्थान भवन, ग्वालियर, म.प्र. फोनः(0751)2422942 ई मेलः shridhargovind@gmail.com
पत्रिका के इस अंक में सामाजिक चिंतन व उससे संबंधित रचनाओं को स्थान दिया गया है। विश्वमोहन तिवारी का आलेख भाषा एवं संस्कृतिः भारतीय संदर्भ हमारी संस्कृति पर गंभीर चिंतन तथा विश्लेषण प्रस्तुत करता है। हिंदुत्व की आधारशिला क्या है?(शैलेन्द्र मटियानी) आलेख इस विषय पर किसी विवाद में न पड़कर सीधे सीधे भारतीय सभ्यता से हिंदुत्व को जोड़ता दिखाई देता है। हमारे स्व की अवधारण कितनी अधिक महत्वपूर्ण है इसे डाॅ .कमलकिशोर गोयनका जी ने अपने आलेख में स्पष्ट किया है। श्रीमती संपत देवी मुरारका, राज चड्ढ़ एवं शत्रुध्न प्रसाद के आलेख पत्रिका को रोचक व ज्ञानवर्धक बनाते हैं। नंदलाल भारती व जगदीश तोमर की कहानियां आज के समाज को नजदीक से देखकर उस पर विचार व्यक्त करती प्रतीत होती है। रेखा कारड़ा की लघुकथा सहित डाॅ. मधुरेश नंदन कुलश्रेष्ठ, अखिलेश त्रिवेदी, डाॅ. ओमप्रकाश सिंह, दामोदर शर्मा, पे्रमबहादुर अजय, चिरंजीलाल भावुक तथा डाॅ. मुक्ता की कविताएं पाठक को अवश्य ही प्रभावित करंेगी। पत्रिका के अन्य स्थायी स्तंभ, समाचार तथा पत्र आदि भी भारतीयता की भावना से ओतप्रोत हैं।

विश्व में हिंदी प्रचार प्रसार के लिए प्रतिब्द्ध-‘विश्व हिंदी समाचार’

पत्रिका-विश्व हिंदी समाचार, अंक-सितम्बर.09, स्वरूप-त्रैमासिक, प्रधान संपादक-डाॅ. विनोद बाला अरूण, संपादक-डाॅ. राजेन्द्र प्रसाद मिश्र, पृष्ठ-12, मूल्य-अनमोल, सम्पर्क- World hindi Secretariat, Swift Lane, Forest side, Mauritius,
Ph. (230)6761196,
ईमेलः whsmauritius@intnet.mu , sgwhs@intnet.mu / dsgwhs@intnet.mu
माॅरिशस से प्रकाशित विश्व हिंदी समाचार अकेली ऐसी पत्रिका है जो विश्व भर के हिंदी प्रेमियों के समाचार एक दूसरे तक पंहुचाती है। मुखपृष्ठ पर हिंदी विद्वानों के सचिवालय आगमन की जानकारी को प्रमुखता से प्रकाशित किया गया है। प्रो. मोहन के गौतम, डाॅ. सुचिता रामदीन, श्री विभूतिनारायण राय, श्री ब्रजेन्द्र त्रिपाठी, श्री अरूणेश नीरन, प्रो. सदानंद शाही एवं डाॅ. विनोद कुमार मिश्र सहित अनेक विद्वानों ने सचिवालय में पधारक र अनुग्रहित किया। हिंदी साहित्य के ख्यात व विश्वप्रसिद्ध विद्वान फाॅदर कामिल बुल्के की जन्मशताब्दी पर पत्रिका ने महत्वपूर्ण आलेख(हिंदी चेतना से साभार) प्रकाशित किया है। पत्रिका की प्रधान संपादक श्रीमती विनोद बाला अरूण ने अपने संपादकीय आलेख में हिंदी के विद्वानों साहित्यकारों को याद किया है। सपादक डाॅ. राजेन्द्र प्रसाद मिश्र ने हिंदी दिवस(14 सितम्बर) को विश्व हिंदी दिवस की संज्ञा दी है। उन्होंने 10 जनवरी(विश्व हिंदी दिवस) एवं 14 सितम्बर के महत्व को पाठकों के समक्ष प्रस्तुत किया है। पत्रिका के पृष्ठ 6 पर राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त पुरस्कारों के समाचार के साथ साथ वरिष्ठ कथाकार मृदुला गर्ग को स्पंदन कथा शिखर सम्मान का समाचार भी प्रमुखता से प्रकाशित किया गया है। ‘ये मेरे कामकाजी शब्द’ तथा ‘प्रवास में पहली कहानी’ के विमोचन का समाचार इन संग्रहों का अध्ययन करने के लिए प्रेरित करता है। कनाड़ा से प्रकाशित पत्रिका ‘हिंदी चेतना’ समीक्षा पत्रिका के प्रति जिज्ञासा जाग्रत करती है। भारत के प्रमुख साहित्यिक पत्रिकाओं के समीक्षाब्लाॅग ‘कथा चक्र’ पर प्रकाशित विश्व हिंदी समाचार’ की जानकारी को इस पत्रिका ने बहुत ही सुंदर ढंग से प्रकाशित किया है। खाड़ी के देशों में हिंदी(पूर्णिमा वर्मन) आलेख हिंदी की वैश्विक उपादेयता-अनिवार्यता पर प्रकाश डालता है। दक्षिण अफ्रीका में हिंदी के प्रचार प्रसार के लिए कार्यरत संस्था ‘हिंदी शिक्षा संघ’ की गतिविधियों की जानकारी प्रो. उषा शुक्ला के माध्यम से पत्रिका ने प्रकाशित की है। अंतिम पृृष्ठ पर प्रकाशित समाचार ‘अमेरिका मंे हिंदी कवि सम्मेलन’ वहां हिंदी की दिन प्रतिदिन बढ़ती लोकप्रियता की जानकारी देता है।

Saturday, November 21, 2009

‘साहित्य सागर’ में मोती अवश्य ही मिलेगा

पत्रिका-साहित्य सागर, अंक-नवम्बर.09, स्वरूप-मासिक, संपादक-कमलकांत सक्सेना, पृष्ठ-52, मूल्य-20रू.(वार्षिक-25000रू.), सम्पर्क-161बी, शिक्षक कांग्रेस नगर, बाग मुगलिया भोपाल म.प्र. फोनः(0755)4260116, ईमेलः kksaxenasahityasagar@rediffmail.com
पत्रिका के इस अंक में डाॅ. दामोदर शर्मा के समग्र पर विचार किया गया है। प्रकाशित प्रमुख आलेखों में- मीरा मानसिंह, रशिम सक्सेना, डाॅ. पुष्पारानी गर्ग, प्रभात दुबे, डाॅ. मायावर, रमेश चंद्र पण्डित एवं काशीनाथ जोशी की रचनाएं शामिल हैं। दामोदर शर्मा पर सोम ठाकुर, प्रकाश दीक्षित, रामप्रकाश अनुरागी एवं डाॅ. भगवान स्वरूप चेतन ने लिखा है। पत्रिका की अन्य रचनाएं स्थायी स्तंभ एवं समाचार आदि भी समसामयिक व उल्लेखनीय हैं।
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Friday, November 20, 2009

साहित्य के लिए केवल ‘पूर्वग्रह’

पत्रिका-पूर्वग्रह, अंक-अक्तूबर-दिसम्बर.09, स्वरूप-त्रैमासिक, प्रधान संपादक-डाॅ. प्रभाकर श्रोत्रिय, पृष्ठ-158, मूल्य-30रू.(वार्षिक-100रू.), सम्पर्क-भारत भवन न्यास, ज. स्वामीनाथन मार्ग, श्यामला हिल्स, भोपाल म.प्र. फोनः (0755)2660239, ईमेलः bharatbhavantrust@gmail.com
पत्रिका के समीक्षित अंक को वरिष्ठ कवि कैलाश वाजपेयी जी पर एकाग्र किया गया हैैै। प्रकाशित आलेखों मंे उनके नाटककार, कवि तथा चिंतक रूप के दर्शन होते हैं। उनकी कविताएं आम जन को विलोड़ित करती प्रतीत होती हैं। सुषमा भटनागर ने उनसे लिए साक्षात्कार में सृजन से संबंधित प्रश्न पूछकर पाठकोपयोगी उत्तर प्राप्त किए हैं। हरदयाल, कुबेरदत्त एवं रमेश ऋषिकल्प उनके अंदर छिपी हुई असीमित क्षमता को अपने आलेखों में व्यक्त करते हैं। राधावल्लभ त्रिपाठी का आलेख ‘वाणी मेरी तुझे चाहिए अलंकार’ तथा विमर्श के अंतर्गत आलेख प्रत्येक कला संस्कृति के जानकार के लिए उपयोगी है। विशेष रूप से श्रीराम परिहार, श्री प्रकाश शुक्ल का विमर्श हर उस आम आदमी के लिए हैै जिसे जीवन का आनंद चाहिए। अमृता भारती तथा बोधिसत्व की कविताएं इस सत्य से साक्षात्कार कराती हैं कि जीवन के पार भी एक और जीवन है। उस जीवन में भी आनंद हर्ष तथा मेलजोल एवं सहिष्णुता के लिए पर्याप्त स्थान है। शांता सरबजीत सिंह, निर्मल कुमार एवं मनमोहन संस्कृति विमर्श के माध्यम से हमारी संस्कृति पर विशेष रूप से दृष्टिपात करते हैं। ख्यात लेखक मुन्ना शुक्ला एवं योगेन्द्र कृष्णा ने साहित्य जगत के उन पहलुओं पर विचार प्र्रगट किए हैं जो प्राय सामान्य पाठक से अछूते रहे हैं। पत्रिका की सर्वाधिक प्रशंसनीय व आत्मसात करने वाली रचना ‘बादल सरकारःतीसरा नाटक’(रणजीत साहा) है। इस आलेख में भारतीय रंगमंच में उनके योगदान की चर्चा की गई है। पूर्वग्रह के प्रत्येक अंक के समान 127 अंक का संपादकीय भी एक विचारपूर्ण गंभीर आलेख है। पत्रिका के इस सुंदर अंक के लिए संपादक श्री प्रभाकर श्रोत्रिय व उनकी टीम बधाई की पात्र है।

Thursday, November 19, 2009

समाचार प्रधान पत्रिका--आसपास

पत्रिका-आसपास, अंक-अक्तूबर.09, स्वरूप-मासिक, संपादक-राजुरकर राज, पृष्ठ-16, मूल्य-5रू.(वार्षिक-60रू.), सम्पर्क-एच.03, उद्धवदास मेहता परिसर, नेहरू नगर, भोपाल 462003 म.प्र. फोनः 0755.2772051 ई मेलः shabdashilpi@yahoo.com,
blog on net http://www.sangrahaiay.blogspot.com/
आसपास मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल से प्रकाशित होने वाली प्रमुख सम्पर्क पत्रिका है। इस पत्रिका का प्रमुख उद्देश्य रचनाकारों-साहित्यकारों के समाचार तथा उनके हाल चाल एक दूसरे तक पहुंचाना है। इस अंक में दादा माखनलाल चतुर्वेदी जी पर समाचार के साथ साथ ख्यात व्यंग्यकार कवि अशोक चक्रधर से संबंधित समाचारों को प्रमुखता से प्रकाशित किया गया है। अन्य समाचारों में प्रमुख हैं-- गोविंद सिंह असिवाल की पुस्तक का लोकर्पण, मीडिया और जनसंवाद का लोकार्पण, मध्यप्रदेश संस्कृति परिषद का गठन एवं अन्य सम्मान तथा पुरस्कार समाचार।

Wednesday, November 18, 2009

दक्षिण भारत से प्रकाशित सर्वगुण संपन्न पत्रिका-अहल्या

पत्रिका-अहल्या, अंक-सितम्बर.09, स्वरूप-मासिक, संपादक-श्रीमती आशा देवी सोमाणी, पृष्ठ-64, मूल्य-20रू.(वार्षिक-225रू.), सम्पर्क-14-1-498ए, ज्ञानबाग रोड़, पान मण्डी के पास, हैदराबाद, 500012(भारत), फोनः 040.24804000
महिला प्रधान विषयों की पत्रिका होते हुए भी अहल्या साहित्यिक पत्रिका की श्रेणी में प्रमुख स्थान रखती है। पत्रिका का स्वरूप अपने प्रस्तुतिकरण के कारण विशिष्टता लिए हुए है। इस अंक में राममोहन गोयल, योगेन्द्र कुमार शर्मा, वीणा पाणी जोशी, विकास अरोड़ा, मिथलेश सिंह, बद्रीनारायण तिवारी, सरला शर्मा की रचनाएं तथा आलेख-कहानियां प्रभावशील हैं। बाल कहानी चतुर सेठ सेठानी(रामनिरंजन शर्मा) तथा ऐतिहासिक कहानी मुण्डनहार(भेरूसिंह राय) एवं प्रेम(देवेन्द्र कुमार मिश्रा) हर वर्ग के पाठक के लिए है। मोहम्मद इस्माइल खन की बस कण्डक्टर तथा सुधा भार्गव की लघुकथा हस्ताक्षर नए विषय पर लिखी गई अच्छी कहानियां है। सुनील गुप्ता, शिवानंद सिंह, बिंदु जी महाराज, बी.पी. दुबे, कालीप्रसाद जायसवाल की कविताएं पत्रिका का प्रमुख आकर्षण है। दक्षिण भारत से प्रकाशित एक अच्छे अंक के लिए बधाई।

Tuesday, November 17, 2009

कम मूल्य में अच्छा साहित्य

पत्रिका-मैसूर हिंदी प्रचार परिषद पत्रिका, अंक-अक्तूबर.09, स्वरूप-मासिक, संपादक-डाॅ. बी. रामसंजीवैया, पृष्ठ-48, मूल्य-5रू.(वार्षिक-50रू.), सम्पर्क-मैसूर हिंदी प्रचार परिषद, 58 वेस्ट आॅफ कार्ड रोड़, राजाजी नगर, बेंगलूर 560010 कर्नाटक (भारत), फोनः 080.23404892 ई मेलः brsmhpp@yahoo.co.in
दक्षिण भारत से प्रकाशित इस पत्रिका ने अल्प समय में देश व्यापि ख्यति अर्जित की है। वर्तमान में पत्रिका का स्वरूप कुछ इस प्रकार का है कि यह आम पाठक को भी साहित्यकारों के समान आकर्षित करती है। इस अंक में प्रकाशित प्रमुख आलेखों में प्रभुलाल चैधरी, डाॅ. एम. शेषन, अनिरूद्ध सिंह सेंगर, वीरेन्द्र सिंह यादव, पदमप्रिया टी., श्री प्रभाशंकर, कृष्ण कुमार यादव, बी. बै. ललिताम्बा, डाॅ. गोरखनाथ तिवारी, राधागोविंद पातर, बृजेश सिंह प्रभावित करते हैं। हितेश कुमार शर्मा, जयराम सिंह जय, देवेन्द्र कुमार मिश्रा की कविताओं सहित जसविंदर शर्मा की कहानी भी पठनीय है। यह पत्रिका अपने कम मूल्य तथा संग्रह योग्य आलेखों केे कारण साहित्य जगत में महत्वपूर्ण स्थान रखती है।

Sunday, November 15, 2009

राष्ट्रीयता से ओतप्रोत पत्रिका- राष्ट्र किंकर

पत्रिका-राष्ट्र किंकर, अंक-मार्च.09, स्वरूप-मासिक, संपादक-विनोद बब्बर, पृष्ठ-64, मूल्य-20रू.(वार्षिक-उपलब्ध नहीं), सम्पर्क-ए-2/9ए, हस्तमल रोड़, उत्तम नगर, नई दिल्ली 110059, ई मेलः rashtrakinkar@yahoo.co.in
नई दिल्ली से प्रकाशित समाचार पत्र का यह विशेषांक है। अंक मंे कुछ उपयोगी व विचारणीय आलेख ों का प्रकाशन किया गया है। इनमें प्रमुख हैं- डाॅ. शरद नारायण खरे, अम्बरीश कुमार, खैराती लाल सचदेवा, ज्योति सेतिया एवं दीपक गोयल। रूद्रपाल गुप्त तथा महेन्द्र मेहतो की कविताएं अंक को सार्थकता प्रदान करती हैं। नंदलाल भारती, डाॅ. मधु गुप्ता एवं एस. आर. सिंह की रचनाएं भी उपयोगी हैं। सुरेश प्रकाश शुक्ल का व्यंग्य तथा अमरेन्द्र सिंह की कहानी प्रभावित करती है। मनप्रीत कौर, ओमप्रकाश बजाज, अनिल सूर एवं राम कुमार घोटड़ की लघुकथाएं आकर्षक हैं। पत्रिका का पंचांग भी पाठकों के लिए उपयोगी व संग्रह योग्य है।

Friday, November 13, 2009

साहित्यिक समाचार प्रधान पत्रिका- नया भाषा भारती संवाद

पत्रिका-नया भाषा भारती संवाद, अंक-जुलाई-सितम्बर.09, स्वरूप-त्रैमासिक, संपादक-नृपेन्द्र नाथ गुप्त, पृष्ठ-152, मूल्य-50रू.(वार्षिक 100रू.), सम्पर्क-भारतीय भाषा साहित्य संगम, श्री उदित आयतन, ब्रहा स्थान पथ, शेखपुरा, पटना 800014 फोनः 0612.2296587
बिहार से प्रकाशित यह एक समाचार प्रधान पत्रिका है। इस पत्रिका में प्रमुख रूप से साहित्यिक समाचारों का प्रकाशन किया जाता है। देश में आज इस तरह की एक अच्छी पत्रिका की आवश्यकता है जो साहित्य जगत की गतिविधियों समाचारों का प्रकाशन कर सके। पत्रिका के इस अंक में संपादक ने अपने अग्रलेख में इस बात का प्रमुख रूप से उल्लेख किया है कि अंग्रेजी को हटाए बिना राजभाषा गुलाम है। डाॅ. छाया सिन्हा ने ‘रामराज्य और तुलसी’ पर एक तुलनात्मक आलेख पाठकों को विचार करने के लिए रखा है। डाॅ. उषा सिंह ने कथाकार नलिनी विलोचन शर्मा के समग्र पर प्रकाश डाला है। मूल्यहीनता पर डाॅ. वरूण कुमार तिवारी का आलेख विश्लेषण प्रस्तुत करता है। युगल किशोर प्रसाद, विधुशेखर पाण्डेय, डाॅ. गणेशदत्त सारस्वत, इंदिरा शबनम तथा डाॅ. परमलाल गुप्त की कविताएं पत्रिका का दूसरा पक्ष है। पत्रिका के दूसरे खण्ड में देश भर के साहित्यिक समाचारों को स्थान दिया गया है। यह पत्रिका भविष्य में अपने केनवास को और भी विस्तृत करेगी ऐसी आशा की जाती है।

Wednesday, November 11, 2009

इलेक्ट्रांनिक मीडिया का भारतीय समाज पर प्रभाव--पुष्पक संपादकीय

पत्रिका-पुष्पक-11, अंक-11, स्वरूप-अनियतकालीन, प्रधान संपादक-डाॅ. अहिल्या मिश्र, पृष्ठ-112, मूल्य-(वार्षिक 250रू.), सम्पर्क-93सी, राजसदन, बेंगलराव नगर, हैदराबाद आंध्र प्रदेश(भारत) फोनः 040. 23703708,
पत्रिका के समीक्षित अंक में साहित्यिक सामग्री को बहुत संुदर ढंग से संजोया गया है। पत्रिका में प्रकाशित प्रमुख रचनाओं में अंतिम इच्छा(लक्ष्मी शर्मा), आशीर्वाद(लता अग्रवाल), नई सुबह का नया सूरज(अहिल्या मिश्रा), दशहरा(संतोष छाबड़ा), बेटियां(ज्योति नारायण), विश्राम, परिश्रम का फल(अखिलेश शुक्ल), हिंदी काव्यधारा में व्यंग्य(शुभदा बांजपे), जानिए अर्थ अहिंसा का (प्रो. जमनालाल बाहेती), भाषा एवं उसके प्रकार्य(मैत्री ठाकुर), स्त्री लेखन(अपर्णा दीप्ति), स्व. विष्णु प्रभाकर एक महान व्यक्तित्व(डाॅ. अहिल्या मिश्रा), अनुवाद विज्ञान की भूमिका(प्रो. नरेश मिश्र), देवनागरी लिपि एवं सूचना प्रौद्योगिकी(रमा द्विवेदी) तथा कादम्बिनी क्लब की गतिविधियां(मीना मूथा) शामिल हैं। कृपाशंकर शर्मा, आचार्य भगवत दुबे, राम द्विवेदी तथा मधु नज़्मी की कविताएं एवं ग़ज़लें तथा गीत पत्रिका को पठनीय व संग्रह योग्य बनाते हैं। कादम्बिनी क्लब हैदराबाद जिस तरह का हिंदी साहित्य के प्रचार प्रसार के लिए कार्य कर रहा है वह अन्य संस्थाओं के लिए अनुकरणीय व विचार करने योग्य है। पत्रिका के संपादकीय में डाॅ. अहिल्या मिश्रा ने इलेक्ट्रानिक मीडिया व समाज पर उसके द्वारा पड़ने वाले दुष्परिणामों पर विस्तृत रूप से चर्चा की है। पत्रिका का त्रुटिहीन मुद्रण व साज सज्जा उसका एक अन्य आकर्षण है।

Tuesday, November 10, 2009

साहित्य की प्रगति के लिए ‘प्रगति वार्ता’

पत्रिका-प्रगति वार्ता, अंक-अक्टूबर.09, स्वरूप-मासिक, प्रधान संपादक-डाॅ. रामजन्म मिश्र, संपादक-सच्चिदानन्द पृष्ठ-52, मूल्य-20(वार्षिक 200रू.), सम्पर्क-प्रगति भवन चैति दुर्गा स्थान, साहिबगंज, झारखण्ड़ फोनः(06436)222467 ईमेलः pragativarta@yahoo.co.in
पत्रिका के इस अंक में प्रकाशित आलेखों में डाॅ. प्रभा दीक्षित, भगवती प्रसाद द्विवेदी तथा भारत आस्तिक विचारणीय हैं। भगवती चरण मिश्र, मधुरकमल, सुरेन्द्र दीप, उर्मि कृष्ण तथा रंजना जायसवाल की कहानियां उनके संदर्भों से पाठकों को जोड़ने में समर्थ हैं। बालकवि बैरागी, अमरेन्द्र, धर्मेन्द्र जैन एवं मनोज जैन की कविताएं विविधता लिए हुए हैं। अन्य रचनाएं व समीक्षाएं भी पाठक अवश्य ही पसंद करेंगे।

Monday, November 9, 2009

साहित्य जगत से साक्षात्कार

पत्रिका-साक्षात्कार, अंक-अगस्त.09, स्वरूप-मासिक, प्रधान संपादक-देवेन्द्र दीपक, पृष्ठ-130, मूल्य-15(वार्षिक 150रू.), सम्पर्क-साहित्य अकादमी, म.प्र. संस्कृति परिषद, संस्कृति भवन, बाण गंगा, भोपाल म.प्र. फोनः(0755)2554782 ईमेलः sahitya_academy@yahoo.com
पत्रिका के इस अंक में कुछ अच्छे सारगर्भित आलेखों का प्रकाशन किया गया है। इनमें प्रभात त्रिपाठी, शैलेन्द्र कुमार त्रिपाठी, महीप सिंह, कैलाश मड़वैया एवं शरद दत्त प्रमुख हैं। अमृत लाल वेंगड़ की नर्मदा परिक्रमा तथा नरेन्द्र जैन की कविताएं उल्लेखनीय हैं। इस बार की कहानी अश्विनी कुमार दुबे द्वारा लिखित निर्णय विशेष प्रभावशाली नहीं है। रविन्द्र स्वप्निल प्रजापति तथा राजकिशोर राजन की कविताएं आज के समाज का सही व सटीक चित्रण करती हैं। पत्रिका की अन्य रचनाएं व समीक्षाएं तथा पत्र आदि भी इसे उपयोगी व पठनीय बनाते हैं।

Sunday, November 8, 2009

विविधतापूर्ण साहित्य की पत्रिका-हिमप्रस्थ

पत्रिका-हिमप्रस्थ, अंक-सितम्बर.09, स्वरूप-मासिक, संपादक-रणजीत सिंह राणा, पृष्ठ-56, मूल्य-5(वार्षिक 50रू.), सम्पर्क-हिमाचल प्रदेश प्रिटिंग प्रेस परिसर, घोड़ा चैकी, शिमला.5, हिमाचल प्रदेश(भारत),
साहित्य की सभी विधाओं के लिए समर्पित इस पत्रिका में उपयोगी जानकारी युक्त आलेखों का प्रकाशन किया गया है। लेखकों में प्रमुख हैं- जगदीश शर्मा, दिनेश कुमार नेगी, जया चैहान, किशोरी लाल शर्मा, हंसा ठाकुर एवं भवानी सिंह। डी. आर. भण्डारी की कहानी प्रायश्चित एक अच्छी व पठनीय कहानी है। ईश्वरचंदर कीे लघुकथा बोनस(अनुवाद5हंूदराज बलवाणी) भी उल्लेखनीय है। कविताओं में हेमचन्द्र सकलानी, एल. आर. शर्मा, दादूराम शर्मा की रचना को पाठक अवश्य ही पसंद करेंगे। इसके अतिरिक्त अन्य रचनाएं व समीक्षा, पत्र आदि भी इस पत्रिका को पाठकांे के अध्ययन के लिए उपयोगी बनाते हैं।

Saturday, November 7, 2009

आकर्षक पत्रिका सुखदा

पत्रिका-सुखदा, अंक-अक्टूबर.09, स्वरूप-मासिक, संपादक-डाॅ.रश्मि शर्मा, पृष्ठ-64, मूल्य-20(वार्षिक 200रू.), सम्पर्क-सी, 805, गे्रजुएट कालोनी, जैन कालेज रोड़, सहारनपुर, उ.प्र. फोनः 0132-2760731(भारत) ईमेलः sukhada49@yahoo.co.in
विविधतापूर्ण साहित्य की यह एक अच्छी तथा उपयोगी पत्रिका है। अंक में डाॅ. कोशल किशोर श्रीवास्तव, मुन्नूलाल, मुकेश पण्डित तथा दिलीप भाटिया के समसामयिक आलेखों का प्रकाशन बहुत ही सुंदर ढंग से कियागया है। कश्मीर सिंह तथा नरेन्द्र आहूजा की कहानी, एवं पंकज शर्मा का व्यंग्य भी पत्रिका के स्तर में वृद्धि करते हैं। राकेश कौशिक तथा बच्चन लाल की लघुकथाएं भी अपने कलेवर के अनुरूप ही है। संजय शर्मा का आलेख गणित की तैयारी कैसे करें विद्याथियों के लिए उपयोगी है। पत्रिका की अन्य रचनाएं भी पठनीय व संग्रह योग्य है। अच्छी प्रस्तुति तथा आकर्षक मुद्रण पत्रिका का एक अन्य पहलू है।

अच्छे साहित्य की उपयोगी पत्रिका--पंखुड़ी

पत्रिका-पंखुड़ी, अंक-7-8 वर्ष.09, स्वरूप-त्रैमासिक, संपादक-विजय बत्रा, पृष्ठ-40, मूल्य-15(वार्षिक 60रू.), सम्पर्क-44 पालिका मार्केट, निकट पांच मंदिर, पोस्ट बाक्स नं. 12, रूद्रपुर 263153, उ.ख. भारत मो. 9837102003
काव्य प्रधान इस पत्रिका की प्रस्तुति तथा विषय वस्तु सहज ही प्रभावित करती है। अंक में सुभाष रस्तोगी, श्याम सुंदर, सुकीर्ति तथा केशरसिंह की अच्छी कविताओं का प्रकाशन किया गया है। डाॅ. वीरेन्द्र सिंह यादव जी स्त्री विमर्श पर आलेख एक शोधपरक अच्छी तथा सारगर्भित रचना है। अशोक गुलशन तथा उषा यादव की ग़ज़लें तथा कविताएं अच्छी बन पड़ी हैं। राजीव रंजन की कहानी उंगलियां तथा पत्रिका की अन्य रचनाएं भी उपयोगी हैं।

Friday, November 6, 2009

साक्षा संस्कृति द्विभाषी पत्रिका-- हिंदुस्तानी जबान

पत्रिका-हिंदुस्तानी जबान-अक्टूबर-दिसम्बर.09, स्वरूप-त्रैमासिक, संपादक-डाॅ. सुशीला गुप्ता, पृष्ठ-52, मूल्य-10(वार्षिक 40रू.), सम्पर्क-महा. गाॅधी मेमोरियल रिसर्च सेंटर एवं लाइब्रेरी, महा. गाॅ. बिल्ंिडग, 7, नेताजी सुभाष रोड़, मुम्बई फोनः(022) 22812871, ई मेलः hpsabha@hotmail.com
गाॅधी साहित्य पर एकाग्र यह पत्रिका हिंदी व उर्दू जबानों में एकसाथ प्रकाशित की जाती है। पत्रिका के समीक्षित अंक में सुभाष संपत, गणेश गुप्त, सुरेन्द्र वर्मा, अनंतकीर्ति तिवारी, सत्यापाल श्रीवत्स एवं डाॅ. परशुराम शुक्ल के आलेख प्रमुखता से प्रकाशित किए गए हैं। शब्दों की रोचक यात्रा आलेख श्री स्वयंप्रकाश जी का लिख हुआ है जो प्रत्येक पाठक के लिए उपयोगी व संग्रह योग्य है। नरसिंह प्रसाद दुबे का भाषा एवं साहित्य पर लिखा गया आलेख भी एक नए ढंग से विषय की व्याख्या करने में पूरी तरह सक्षम है। पत्रिका के एक और अच्छे अंक के लिए बधाई।

Tuesday, November 3, 2009

एक ‘कथन’ उजास भरा--

पत्रिका-कथन, अंक-अक्टूबर-दिसम्बर.09, स्वरूप-त्रैमासिक, संपादक-संज्ञा उपाध्याय, पृष्ठ-98, मूल्य-25(वार्षिक 100रू.), सम्पर्क-107, साक्षरा अपार्टमेंट, ए-3 पश्चिम विहार, नयी दिल्ली 110063 भारत फोनः(011)25268341, ईमेलः kathanpatrika@hotmail.com
पत्रिका के समीक्षित अंक की तीनों कहानियां बहुत ही अच्छी हैं। टिप्पल(कामेश्वर पाण्डेय), जो बिकता है(जितेन ठाकुर) तथा घर चले गंगाजी(प्रियदर्शन) आज के समाज व उससे जुड़े संदर्भो को विश्लेषित करती चलती है। कविताओं में विजेंद्र, राजेंद्र नामदेव, राकेश रंजन तथा सुरेश सेन ने कुछ नए विषय उठाकर उनपर नए ढंग से विचार किया है। लीलाधर मंडलोई की कविताओं पर राजेश जोशी का आलेख मंडलोई जी की कविताओं पर विस्तृत टिप्पणी देता है। संतोष चैबे ने अपनी कहानी ‘महान कलाकार’ के माध्यम से ख्यात रंगकर्मी हबीब तनवीर को याद किया है। अफगान की वर्तमान परिस्थितियों पर यादवेंद्र जी का आलेख और भी विस्तृत रूप से वहां के हालातों को बयान करता तो अधिक अच्छा होता और यह आलेख पाठकों के लिए संग्रह योग्य हो जाता। लेकिन फिर भी इसकी उपयोगिता तथा पठनीयता पर किसी तरह का संदेह नहीं किया जा सकता। साहित्य और सामाजिक आंदोलन(रमेश उपाध्याय) तथा साहित्यिक आंदोलन का भविष्य(शंभुनाथ) साहित्य के गंभीर पाठकों की भूख शांत करने में सक्षम हैं। पत्रिका की अन्य रचनाएं, पर तथा समीक्षा भी बांधे रखने में पूरी तरह सफल रही है। एक और अच्छे अंक के लिए पत्रिका की संपादक बधाई की पात्र है।

Monday, November 2, 2009

विष्णु प्रभाकर जी पर एकाग्र-मित्र संगमपत्रिका

मित्रसंगम पत्रिका, अंक-11वर्ष.09, स्वरूप-मासिक, संपादक-प्रेम वोहरा, पृष्ठ-18, मूल्य-5(वार्षिक 60), सम्पर्क-35बी, पुरानी गुप्ता कालोनी, दिल्ली भारत
पत्रिका का समीक्षित अंक विष्णु प्रभाकर जी पर एकाग्र है। इस ख्यात रचनाकार पर पत्रिका में पत्र, परिचय एवं रचनाएं आदि प्रकाशित की गई हैं। पत्रिका से विष्णु प्रभाकर जी के जीवन से संबंधित कुछ उपयोगी व संग्रह योग्य जानकारी हासिल होती है।

Sunday, November 1, 2009

संस्कृत साहित्य की पत्रिका--सम्राट पुष्यमित्र

पत्रिका-सम्राट पुष्यमित्र, अंक-प्रथम.09, स्वरूप-अनियतकालीन, संपादक-डाॅ. कृष्णनारायण पाण्डेय, पृष्ठ-36, मूल्य-50(वार्षिक उपलब्ध नहीं), सम्पर्क-समन्वय कुटीरम्, ई-1052, राजाजीपुरम, लखनऊ 226.017 उ.प्र. फो. 0522.2416897
संस्कृत प्रधान पत्रिका के इस अंक में विभिन्न स्थानों का संस्कृत में सुंदर वर्णन किया गया है। इन स्थानों में प्रमुख है- विदिशा, उज्जैन, मथुरा, पाटलिपुत्र, अयोध्या प्रमुख है। हिंगलाज शक्तिपीठ पर भी पत्रिका में एक उपयोगी आलेख प्रकाशित किया गया है।

समवेत सुमन का कहानी विशेषांक

पत्रिका-समवेत सुमन, अंक-09वर्ष2009, स्वरूप-अनियतकालीन, संपादक-देवेन्द्र सिंह दाऊ, पृष्ठ-72, मूल्य-रू.अंकित नहीं, सम्पर्क-कछवाहधार साहित्य सृजन समिति, रौन, जिलाः भिण्ड म.प्र.
पत्रिका का समीक्षित अंक कहानी विशेषांक है। इस लघुपत्रिका में लगभग आठ कहानियां, सत्ररह कविताएं एवं नौ पुस्तक समीक्षा सहित दो आलेखों का प्रकाशन किया गया है। कविताओं में एम.पी. बघेल, देवेन्द्र सिंह दाऊ एवं डाॅ. क्रांति उल्लेखनीय हैं। भूमिका त्रिपाठी एवं त्रिभुवन नाथ शुक्ल की कहानी प्रभावित करती है। समीक्षाएं भी और अधिक अच्छी हो सकती थीं यदि संपादक उन्हें स्वयं न लिखकर अन्य समीक्षकों से लिखवाकर छापते।