Sunday, December 20, 2009

कब तक बनी रहेगी हिंदी अंगेजी की स्टेपनी-मैसूर हिंदी प्रचार परिषद पत्रिका

पत्रिका-मैसूर हिंदी प्रचार परिषद पत्रिका, अंक-नवम्बर.09, स्वरूप-मासिक, संपादक-डाॅ. बि रामसंजीवैया, पृष्ठ-48, मूल्य-5 रू.(वार्षिक 50रू.), सम्पर्क-मैसूर हिंदी प्रचार परिषद्, 58, वेस्ट आॅफ कार्ड रोड़, राजाजी नगर, बेंगलूर 560.010, फोनः(080)23404892, ईमेलः brsmhpp@yahoo.co.in
पत्रिका के इस अंक में भारतीय साहित्य व संस्कृति से संबंधित उपयोगी आलेखों को स्थान दिया गया है। इनमें प्रमुख हैं-- इंदिरा गांधी एक अभूतपूर्व भरा आत्मविश्वास(प्रेमसिंह चेतन), राजभाषा नीति और वार्षिक कार्यक्रम(श्री कृष्णकुमार ग्रोवर), तुलसी भक्त हिंदी योद्धाः फादर कामिल बुल्के(डाॅ. एम.शेषन), हिंदी सेवी बेलजियन डाॅ. कामिल बुल्के(गणेश गुप्त), रामचरित मानस का उत्तर कांड़(इंद्रराज वैद), कब तक बनी रहेगी हिंदी अंग्रेजी की स्टेपनी(एन.एस. शर्मा) प्रमुख हैं। अन्य रचनाओं में धनसिंह खोबा, डाॅ. मोहन आनंद, देवेन्द्र कुमार मिश्रा प्रभावित करते हैं। पत्रिका के अन्य स्थायी स्तंभ, रचनाएं पत्र आदि भी पाठकोपयोगी व जानकारीप्रद हैं।

No comments:

Post a Comment