Tuesday, December 22, 2009

एक चिंगारी कहीं से ढूढ लाओ दोस्तों(दुष्यंत कुमार)--संदर्भ ‘वागर्थ’ संपादकीय

पत्रिका-वागर्थ, अंक-दिसम्बर.09, स्वरूप-मासिक, संपादक-डाॅ. विजय बहादुर सिंह, पृष्ठ-138, मूल्य-20 रू.(वार्षिक 200रू.), सम्पर्क-भारतीय भाषा परिषद्, 36 ए, शेक्सपियर सरणि, कोलकाता 700017, फोनः(033)22817476, ईमेलः bbparishad@yahoo.co.in
पत्रिका के दिसम्बर .09 अंक में दस्तावेज स्तंभ के अंतर्गत एक पठनीय तथा जानकारीपरक आलेख मौलवी और डाॅ. नजफ़ का मुकदमा(सुधीर विद्यार्थी) प्रकाशित हुआ है। ख्यात कवि कंुवरनारायण जी से लता जी की बातचीत उनके कई रचनात्मक पहलुओं पर प्रकाश डालती है। ए. असफल की लम्बी कहानी संदेश, दो औ र दो चार नहीं(शशि जैन) तथा क़ब्रखोदवा(नसीम साकेती) नए जमाने के नए ढंग की कहानियां हैं। कविताओं में तेजराम शर्मा, सत्येन्द्र श्रीवास्तव तथा सूर्यकुमार पाण्डेय ने साहित्य के आईने से समाज को देखते हएु रचना की है। ख्यात आलोचक, संपादक डाॅ. प्रभाकर श्रोत्रिय जी का आलेख ‘हिंदी भाषा और साहित्यः दृश्य व दृष्टि’ एक पाठकोपयोगी रचना है। अमृतलाल वेगड़, भवदेव पाण्डेय तथा नवेन्द्रु घोष के आलेख भी अपनी विविधता के कारण अवश्य ही पसंद किए जाएंगे। पत्रिका की अन्य रचनाएं व सामग्री संग्रह योग्य व पठ्नीय है।
विशेषः ..... उनकी ग़ज़लें- जिन्हें अब नामवर सिंह कालजयी कह रहे हैं- इस धुंधुआती पीडा की अचानक भभक उठीं अभिव्यक्तियां हैं। ...(वागर्थ के संपादकीय से साभार) आगे पढ़ें पत्रिका वागर्थ में

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