Wednesday, November 11, 2009

इलेक्ट्रांनिक मीडिया का भारतीय समाज पर प्रभाव--पुष्पक संपादकीय

पत्रिका-पुष्पक-11, अंक-11, स्वरूप-अनियतकालीन, प्रधान संपादक-डाॅ. अहिल्या मिश्र, पृष्ठ-112, मूल्य-(वार्षिक 250रू.), सम्पर्क-93सी, राजसदन, बेंगलराव नगर, हैदराबाद आंध्र प्रदेश(भारत) फोनः 040. 23703708,
पत्रिका के समीक्षित अंक में साहित्यिक सामग्री को बहुत संुदर ढंग से संजोया गया है। पत्रिका में प्रकाशित प्रमुख रचनाओं में अंतिम इच्छा(लक्ष्मी शर्मा), आशीर्वाद(लता अग्रवाल), नई सुबह का नया सूरज(अहिल्या मिश्रा), दशहरा(संतोष छाबड़ा), बेटियां(ज्योति नारायण), विश्राम, परिश्रम का फल(अखिलेश शुक्ल), हिंदी काव्यधारा में व्यंग्य(शुभदा बांजपे), जानिए अर्थ अहिंसा का (प्रो. जमनालाल बाहेती), भाषा एवं उसके प्रकार्य(मैत्री ठाकुर), स्त्री लेखन(अपर्णा दीप्ति), स्व. विष्णु प्रभाकर एक महान व्यक्तित्व(डाॅ. अहिल्या मिश्रा), अनुवाद विज्ञान की भूमिका(प्रो. नरेश मिश्र), देवनागरी लिपि एवं सूचना प्रौद्योगिकी(रमा द्विवेदी) तथा कादम्बिनी क्लब की गतिविधियां(मीना मूथा) शामिल हैं। कृपाशंकर शर्मा, आचार्य भगवत दुबे, राम द्विवेदी तथा मधु नज़्मी की कविताएं एवं ग़ज़लें तथा गीत पत्रिका को पठनीय व संग्रह योग्य बनाते हैं। कादम्बिनी क्लब हैदराबाद जिस तरह का हिंदी साहित्य के प्रचार प्रसार के लिए कार्य कर रहा है वह अन्य संस्थाओं के लिए अनुकरणीय व विचार करने योग्य है। पत्रिका के संपादकीय में डाॅ. अहिल्या मिश्रा ने इलेक्ट्रानिक मीडिया व समाज पर उसके द्वारा पड़ने वाले दुष्परिणामों पर विस्तृत रूप से चर्चा की है। पत्रिका का त्रुटिहीन मुद्रण व साज सज्जा उसका एक अन्य आकर्षण है।

1 comment:

  1. धनयवाद पत्रिका-पुष्पक के बारे मै बताने के लिये

    ReplyDelete