Wednesday, October 14, 2009

इसमें पढ़ने के लिए बहुत कुछ है

पत्रिका-समन्वय, अंक-अप्रैल.09, स्वरूप-अर्द्धवार्षिक, संपादक-सदानंद प्रसाद गुप्त, पृष्ठ-205, मूल्य-70रू.(आजीवन रू.1000), संपर्क-पारिजात 65 आई, जंगल शालिगराम, गोरखपुर 273014 उ.प्र. फोनः(0551)2284114
पत्रिका का प्रकाशन अखिल भारतीय साहित्य परिषद गोरखपुर से किया जाता है। समीक्षित अंक में कुछ महत्वपूर्ण आलेखों को प्रकाशित किया गया है। इनमे लेखकों में शामिल हैं--श्री रमेश चंद्र शाह, शत्रुध्न प्रसाद, कल्पना शाह, हरीश शर्मा, दिलशाद जीलानी, माधव प्रसाद पाण्डेय तथा सूर्यकांत प्रसाद। नित्यानंद श्रीवास्तव का विमर्श ‘ग़ज़ल की जमीन तो हिंदी ने तैयार की है’ संजोकर रखने योग्य है। देवेन्द्र आर्य, श्याम विद्यार्थी, विनय मिश्र, रामशंकर चंचल तथा जसवंत ंिसंह विरदी की कविताएं पत्रिका के कलेवर का विस्तार करती हैं। भाषांतर के अंतर्गत विपिन पवार का आलेख ‘गुजराती साहित्य और गांधी जी’ कुछ नए प्रश्न व उनके उत्तर सामने लाता है। पत्रिका की अन्य रचनाएं व समीक्षाएं नए प्रकाशनों की विस्तार से जानकारी देने में सफल रही हैं।

2 comments:

  1. वाकई पठनीय पत्रिका है। जानकारी के लिए आभार।
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  2. आप को ओर आप के परिवार को दीपावली की शुभ कामनायें

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