Friday, September 25, 2009

साहित्य एवं कलाओं पर विशेष सामग्री युक्त पत्रिका पूर्वग्रह

पत्रिका-पूर्वग्रह, अंक-जुलाई-सितम्बर.09, स्वरूप-त्रैमासिक, संपादक-डाॅ. प्रभाकर श्रोत्रिय, पृष्ठ-126, मूल्य-30रू.(वार्षिक 100रू.), संपर्क-भारत भवन न्यास, जे. स्वामीनाथन मार्ग, श्यामला हिल्स, भोपाल, म.प्र. ph.(0755) 2660239, 2661398
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पूर्वग्रह का अंक 126 अपने पूर्ववर्ती अंकों के समान उपयोगी, संग्रहयोग्य सामग्री से परिपूर्ण है। अंक में ख्यात रंगकर्मी तथा भारतीय नाट्यजगत की विशेषताओं से विश्व भर को परिचित कराने वाली विभूति स्व. हबीब तनवीर पर विशिष्ठ आलेख सम्मिलित किए गए हैं। इनमें प्रमुख हैं- अशोक वाजपेयी जी का आलेख, शाहिद अनवर की निजता का संवाद, विनय उपाध्याय की बातचीत प्रमुख हैं। हिंद स्वराज्य एवं गाॅधीवादी साहित्य पर एकाग्र रचनाओं में नरेश मेहता, धर्मपाल एवं गिरिराज किशोर जी ने अपनी बात रखते हुए आज के संदर्भो पर भी गंभीरतापूर्वक विचार किया है। प्रेमरंजन अनिमेष की प्रकाशित कविताओं में अनानास एवं सपने में कविता विशिष्ट रचनाएं हैं। इनमें वाद-विवाद-प्रतिवाद की अपेक्षा समय से संवाद करने का प्रयास सफलतापूर्वक किया गया है। मंजरी सिन्हा ने गोपाल वेणु जी से बातचीत में नृत्य की बारीकियों की चर्चा के साथ साथ केरल की लुप्त हो रही कलाओं के संरक्षण के लिए किए गए प्रयास पर भी चर्चा की है। विनोद भारद्वाज ने प्रख्यात कलाकार फ्रांसिस न्यूटन सूजा पर अपने आलेख में उनके सृजन के साथ साथ उनकी उदारता एवं स्वभावगत विशेषताओं का उल्लेख किया है। इस आलेख को और भी विस्तारपूर्वक लिखा जाना चाहिए था। इतने भर से एक ख्यात कलाकार का विश्लेषण संभव नहीं है। पीयूष दइया का लोक कलाओं एवं कलाकारों पर आलेख राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत को समझने का अवसर प्रदान करता है। इसके अतिरिक्त शंकर शरण का समीक्षालेख ‘साहित्य आलोचना और समाज’, चन्द्रकला त्रिपाठी की कलाडायरी ‘जिंदगी एक बाह हरा रंग’ एवं नवनीता देवसेन का विश्लेषण संग्रह योग्य पठ्नीय आलेख हैं। पत्रिका के अन्य स्थायी स्तंभ के साथ साथ संपादक डाॅ. प्रभाकर श्रोत्रिय जी का संपादकीय भी विचारणीय है तथा विस्तारित पुर्नविश्लेषण की मांग करता है। क्योंकि स्व. विष्णु प्रभाकर ने तो बहुत कुछ लिखा पर उनपर अभी तक बहुत अधिक काम नहीं हुआ है। हबीब तनवीर से तो पाठक भलीभांति परिचित है पर शायद वह बादल सरकार से परिचित न हो। संपादकीय में श्रोत्रिय जी ने उनके परिचय सफलतापूर्वक कराया है। पूर्वग्रह के एक और उपयोगी संग्रह योग्य व पठ्नीय अंक के लिए बधाई।

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