Wednesday, September 23, 2009

कथाकार संजीव जी पर बेजोड़ साहित्यिक सामग्री--संदर्भ ‘पाखी’

पत्रिका-पाखी, अंक-सितम्बर.09, स्वरूप-मासिक, संपादक-अपूर्व जोशी, पृष्ठ-188, मूल्य-40रू.(वार्षिक 240रू.), संपर्क-इंडीपेन्डेंट मीड़िया इििशएटिव सोसायटी, बी-107, सेक्टर 63, नोएडा 201303 उ.प्र.(भारत) फोन (0120)4070300, 4070398 ई मेल: pakhi@pakhi.in, pakhi@thesundaupost.in
पाखी का समीक्षित अंक वरिष्ठ कथाकार संजीव पर एकाग्र है। अंक में उनसे संबंधित बहुत ही उपयोगी व संग्रह योग्य सामग्री प्रकाशित की गई है। पत्रिका में प्रकाशति कहानियों में सभी कहानियां संजीव जी की प्रतिनिधि रचनाएं हैं। कहानी अपराध, आरोहण व मानपत्र तो हिंदी ही भारतीय भाषाओं में अब तक प्रकाशित कहानियों में सर्वश्रेष्ठ है। पत्रिका के पाठक कथाकार-उपन्यासकार संजीव के कवि रूप से रूबरू होगें। उनकी कविताओं में शहीदों के नाम, गाडीवान व रेगिस्तान पठ्नीय व विचारणीय है। पत्र एवं संस्मरण खण्ड में राजेन्द्र यादव, स्वयंप्रकाश, शिवमूर्ति, संजय, प्रेमपाल शर्मा, भोला सिंह, शिवकुमार यादव एवं रामप्यारे प्र्रजापति के स्मृति चित्र संजीव को नजदीक से जानने का अवसर प्रदान करते हैं। जब वरिष्ठ आलोचक साहित्यकार डाॅ. नामवर सिंह कहते हैं कि, ‘मेरी राय में संजीव का मूल्यांकन करना भारी काम है।’ तब संजीव की साहित्यिक गंभीरता का पता चलता है। संजीव जी के सृजन तथा लेखन यात्रा पर डाॅ. नामवर सिंह, राजेन्द्र यादव, विश्वनाथ त्रिपाठी, रोहिणी अग्रवाल, गोपेश्वर सिंह, सुरेन्द्र स्निग्ध, दीनबंधु तिवारी, भालचंद्र जोशी, सत्यकाम, रामविनय शर्मा, रविशंकर सिंह, राकेश बिहारी, रमेश प्रजापति एवं अशोक मिश्र ने आलेख लिखे हैं। राकेश श्रीवास्तव, पे्रम भारद्वाज एवं गुंजन कुमार ने संजीव की साहित्यिक यात्रा के साथ साथ एक सामान्य शासकीय कर्मचारी की हैसियत से भी देखा है तथा उस साधारण में छिपे असाधारण कथाकार को ढूंढने का सफल प्रयास किया है। पाखी के संपादक अपूर्व जोशी से साक्षात्कार में उन्होंने स्वीकार किया है, ‘लेखक को अपनी सीमा पता होनी चाहिए।’ यह कथन एक कथाकार के महान होने का संकेत देता है। मेरे ख्याल से संजीव से भी अधिक उर्जावान, क्षमतावान कथाकार उनकी पत्नी श्रीमती प्रभावती देवी है जिन्होंने जीवन के यथार्थ को बड़ी ही बेबाकी से अपने साक्षात्कार में स्पष्ट किया है। पत्रिका पाखी के इस अंक को प्रत्येक उस साहित्यकार को पढ़ना चाहिए जो कथा लेखन करना चाहता है। उत्कृष्ट, साफ सुथरी साज सज्जा युक्त अंक के लिए संपादक व उनकी टीम बधाई की पात्र है।

2 comments:

  1. ्बहुत सुंदर समीक्षा.
    धन्यवाद

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