Monday, September 21, 2009

आम जन की सहज सुलभ पत्रिका--परती पलार

पत्रिका-परती पलार, अंक-जुलाई-सितम्बर.09, स्वरूप-त्रैमासिक, प्रधान संपादक-नमिता सिंह, पृष्ठ-80, मूल्य-20रू.(वार्षिक 80रू.), संपर्क-परती पलार, आश्रम रोड़, वार्ड़ नं. 04, अररिया 854311 फोन(06455)222610
साहित्यिक शोधपरक त्रैमासिकी परती पलार का समीक्षित अंक विविधतापूर्ण रचनाओं से युक्त है। इसमें जसवंत सिंह विरदी, सुशांत सुप्रिय, राजेन्द्र परदेसी, व डाॅ. सुरेन्द्र मंथन की प्रभावशाली कहानियां प्रकाशित की गई हैं। प्रमुख आलेखों में - आत्मानुशासन का पर्व(राम बहादुर व्यथित), प्रेमचंद्र की भाषा(डाॅ. शिवनंदन कपूर), मुंशी प्रेमचंद्र का जीवन दर्शन(जे.के.एन. नाथनू) हैं। डाॅ. अर्चना नायक की ओड़िया कहानी ‘चमत्कार’ का हिंदी अनुवाद बहुत ही सरस व सरल है। लघुकथाओं में भावना वर्मा, सुलोचना शर्मा ‘लोचन’, आनंद दीवान, श्याम सखा श्याम प्रभावित करते हैं। विलेश चतुर्वेदी, डाू. राम बहादुर व्यथित, अंकुश्री, सुधीर कुशवाह, राजीव जैन, रामचरण यादव, हरिकिशोर चतुर्वेदी, भगवान दास जैन, प्रवीण काम्बोज, डाॅ. अनिल कुमार, अनिरूद्ध सिन्हा, ओमप्रकाश कादयान एवं नलिनीकांत की कविताएं पत्रिका के स्तर के अनुरूप हैं। पुस्तक समीक्षा, यात्रा विवरण, पत्र, साहित्यिक समाचार आदि भी पठ्नीय व हिंदी साहित्य को आम ज न तक पहुुंचाने मंे सफल रहे हैं।

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