Saturday, June 20, 2009

केरल से प्रकाशित हिंदी साहित्य की पत्रिका का स्वागत किया जाना चाहिए

पत्रिका-केरल हिंदी साहित्य अकादमी शोध पत्रिका, अंक-जन.09, स्वरूप-मासिक, संपादक-डाॅ. एन.चन्द्रशेखरन नायर, पृष्ठ-24, संपर्क-श्री निकेतन, लक्ष्मीनगर, पट्टम पालस, पोस्ट तिरूवनन्तपुरम 695.004 केरल(भारत)
पत्रिका का समीक्षित अंक एक सार्थक व उपयोगी प्रस्तुति है। पत्रिका के इस अंक में कोर्टमार्शल-दलितोउन्मुख पुनरीक्षण(डाॅ. आन्टणी पी.एम.), साहित्य और उसका रस(कविता रानी), महिला सशक्तिकरणः ओडिया साहित्य के संदर्भ में(अर्जुन शतपथी) नए ढंग से लिखे गए आलेख हैं जिनमें पाठक को बहुत कुछ पढ़ने के लिए प्राप्त होता है। डाॅ. वीरेन्द्र शर्मा की अक्षरगीता पढकर एक नए आनंद की अनुभूति होती है। केरल से प्रकाशित हिंदी साहित्य की पत्रिका का स्वागत किया जाना चाहिए।

2 comments:

  1. जरुर. बहुत सुंदर जानकारी दी आप ने इस सहित्या के बारे.
    धन्यवाद


    मुझे शिकायत है
    पराया देश
    छोटी छोटी बातें
    नन्हे मुन्हे

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  2. जरूर स्वागत होना चहिये. स्वागत है.

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