Saturday, June 20, 2009

नए व प्रतिभाशाली रचनाकारों को भी स्थान दिए जाने की आवश्यकता--अक्षरा

पत्रिका-अक्षरा, अंक-मई-जून.09, स्वरूप-द्वैमासिक, प्रधान संपादक-कैलाश चन्द्र पंत, प्रबंध संपादक-सुशील कुमार केड़िया, सम्पादक-डाॅ. सुनीता खत्री, पृष्ठ-120, मूल्य-20रू.(वार्षिक 120रू.) संपर्क-म.प्र. राष्ट्रभाषा प्रचार समिति, हिंदी भवन, श्यामला हिल्स, भोपाल म.प्र.(भारत)
पत्रिका के समीक्षित अंक में भारतीय आलोचना परंपरा से संबंधित आलेख मनोविमर्शःसाहित्यालोचन के संदर्भ मंे(प्रो. रमेश चंन्द्र शाह) मानव की वैचारिकता तथा अमूत्र्त चिंतन को व्यक्त करता है। धरोहर के अंतर्गत ‘धर्म का आधारःआचरण’(अज्ञेय) तथा आर्ष परंपरा और हजारी प्रसाद द्विवेदी’(राममूर्ति त्रिपाठी) आलेख भारतीय काव्य तथा दर्शन को विस्तार से व्यक्त करते हैं। युगेश शर्मा का आचार्य राममूर्ति त्रिपाठी को याद करता आलेख तथा ओम प्रकाश मंगोला, सुरेन्द्र बंसल, कृष्ण चन्द्र गोस्वामी तथा कृष्ण चन्द्र गुप्त की वैचारिकी वर्तमान संदर्भो को अतीत से जोड़कर उनकी व्याख्या करते में सफल रही है। ऋतु सारस्वत तथा जसविंदर शर्मा की कहानियों के कथ्य में नवीनता नहीं दिखाई दी हालांकि विषय का चयन सोच समझकर किया गया है। गोपाल नारायण आवटे की कहानी ‘एहसास’ साहित्यिकता से भरपूर रचना है। पत्रिका का कविता खण्ड अधिक प्रभावशाली है। राजकुमार कुम्भज, गजानन चैहान, लखन लाल आरोही की कविताएं विषय वस्तु की पुनरावृति से दूर लगी जो आज के संदर्भ में अति आवश्यक है। प्रणव कुमार बनर्जी का यात्रा वृतांत, रमेश दवे का आलेख तथा समीक्षाएं पत्रिका को पठनीय तथा संग्रह योग्य बनाने में पूर्णतः सफल रही हैं। अक्षरा का सादा साफ सुथरा ऋुटि रहित मुद्रण आकर्षक व प्रभावशाली है। आशा है अंको के प्रकाशन का शतक पूरा करने के पश्चात दोहरे शतक तक की यात्रा में नए व प्रतिभाशाली रचनाकारों को स्थान देगा।

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