Sunday, May 24, 2009

हिमगिरि क्या पत्थर है केवल?--साहित्य सागर

पत्रिका-साहित्य सागर, अंक-मई.09, स्वरूप-मासिक, संपादक-कमलकांत सक्सेना, पृष्ठ-52, मूल्य-20रू.(वार्षिक200रू.), संपर्क-161बी. शिक्षक कांग्रेस नगर, बाग मुगलिया, भोपाल म.प्र.
पत्रिका के ग्रीष्म अंक में ग्रीष्म की कुछ अच्छी कविताओं का समावेश किया गया है। अक्षय ओझा, राम स्नेही लाल शर्मा, हरिप्रकाश जैन, की कविताएं ग्रीष्म में भी आनंदित करती हैं। मां शीर्षक कविताओं में(विशेष आयोजन के अंतर्गत) रमेश सोबती, जयजय राम आनंद, घनश्याम योगी तथा अरूण अपेक्षित की कविताओं में सारगर्भित सामग्री का समावेश किया गया है। प्रख्यात साहित्यकार नर्मदेश भावसार पर एकाग्र लेखों में कालूराम पाक्षिक, गोवर्धन दास मेहता, कैलाश ‘आदमी’ तथा गोविंद प्रसाद चतुर्वेदी के आलेख नए अंदाज में भावसार जी पर प्रकाश डालते हैं। पत्रिका के अन्य स्थायी स्तंभ तथा सामग्री भी उपयोगी तथा पठनीय है।

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