Sunday, May 10, 2009

वियाबान में साहित्य की लहलहाती फसल-परती पलार

पत्रिका-परती पलार, अंक-जन.-मार्च2009, स्वरूप-त्रैमासिक, संपादक-नमिता सिंह, पृष्ठ-130, मूल्य-30रू.,(वार्षिक120रू), संपर्क-आश्रम रोड़, वार्ड नं. 8, अररिया, 854311
Note: Are you interested in free visitors on your blog? Free advertising
पत्रिका का समीक्षित अंक हास्य व्यंग्य विशेषांक है। रचनाओं को संपादक ने बहुत ही सुंदर ढंग से संजोया है। व्यंग्य एवं हास्य पर लिखे गए प्रमुख आलेखों में महेश चंद्र शर्मा, कृष्ण कुमार यादव, स्नेह किरण तथा डाॅ. चम्पा सिंह की रचनाएं नवीनता लिए हुए है। हास्य व्यंग्य में श्याम सुुंदर घोष, ओम प्रकाश मंजुल, ध्रुव ताती, हितेष कुमार शर्मा, संतोष खरे, प्रेम विज, राजा राघव तथा आलोक दत्त प्रभावित करते हैं। आनंद दीवान, ओम प्रकाश कादयान, ओम प्रकाश बजाज तथा आजाद राजीव रंजन की लघुकथाएं लघु होते हुए भी कथात्मकता लिए हुए हैं। अरविंद विद्रोही, पारसनाथ, रीता हजेला आराधना, राधेलाल विजघावने तथा डाॅ. नवल किशोर दास की क्षणिकाएं पत्रिका की मूल भावना के अनुरूप हैं। पत्रिका के अन्य स्थयी स्तंभ तथा साहित्यिक सामग्री भी उत्तम पठनीय तथा संग्रह योग्य हैं। वर्तमान में छोटे स्थानों से जो साहित्यिक पत्रिकाएं प्रकाशित हो रहीं हैं उन्होंने उन साहित्यकारों को प्रकाश में लाने का महत्वपूर्ण कार्य किया है जिसकी बहुत अधिक आवश्यकता थी।

No comments:

Post a Comment