Saturday, May 2, 2009

साहित्य में व्यक्ति और समाज का परिचायक- प्रगतिशील आकल्प

पत्रिका-प्रगतिशील आकल्प, अंक-अप्रैल-सितम्बर.09, स्वरूप-त्रैमासिक, संपादक-डाॅ. शोभनाथ यादव, पृष्ठ-20(टैब्लाइड आकार), मूल्य-आजीवन रू.1000(प्रति अंक, वार्षिक मूल्य उपलब्ध नहीं), संपर्क-पंकज क्लासेस, पोस्ट आॅफिस बिल्ंिडग, जोगेश्वरी पूर्व मुम्बई, महाराष्ट्र(भारत)
पत्रिका का समीक्षित अंक ‘जागो भारत जागो......’ विशेषांक के रूप में प्रकाशित किया गया है। अंक में ख्यात रचनाकारों के विचारों से परिचित कराया गया है। इनमें प्रमुख हैं- नंद कुमार मनोचा ‘वारिज’, डाॅ. अब्दुल कलाम, एल.एम. हरदेनिया, डाॅ. सोहन शर्मा, मनमोहन सरल, रामदेव शुक्ल, डाॅ. उषा यादव, राजेन्द्र परदेसी, संतोष श्रीवास्तव, डाॅ. सुरेश उजाला, मधु राज मधु, डाॅ. सुशीला गुप्ता, डाॅ. विनय, रामअवतार यादव प्रमुख हैं। डाॅ. वीरेन्द्र सिंह यादव का आलेख ‘संयुक्त राष्ट्रसंघ में हिंदी आवश्यक’ वर्तमान संदर्भो में वैश्विक स्तर पर हिंदी की अनिवार्यता को दर्शाता है। भारतीयता के लिए जो कुछ किया गया है उसे सामूहिक जिम्मेदारी के साथ बढाए जाने की आवश्यकता है।
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