Sunday, April 26, 2009

‘रिश्ते हमारी संस्कृति का उपहार है’-शुभ तारिका

पत्रिका-शुभ तारिका, अंक-अप्रैल.09, स्वरूप-मासिक, संपादक-श्रीमती उर्मि कृष्ण, पृष्ठ-30, मूल्य-12रू.,वार्षिक120रू., संपर्क- कृष्णदीप ए.47, शास्त्री कालोनी अम्बाला छावनी, हरियाणा (भारत)Agra_Hotels
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कहानी लेखन महाविद्यालय अम्बाला की पत्रिका के इस अंक में विजया जैन, किशोरी लाल वर्मा, हंसमुख रामदेपुत्रा, हेमंत यादव, संतोष परिहार तथा नरेन्द्र आहूजा की लघुकथाएं प्रकाशित की गई हैं। विनय मिश्र, सुमन सिंह तथा माला वर्मा की कविताएं पठनीय व संग्रह योग्य हैं। पत्रिका का मुख्य आकर्षण डाॅ. महराज कृष्ण जैन का कहानी लेखन पर आलेख है। इस आलेख में कहानी लेखन की मूलभूत बातों को स्पष्ट किया गया है। अर्जुन सिंह का व्यंग्य तथा मृदुला छाजन की कहानी अंक को भव्यता प्रदान करती है। ‘रिश्ते हमारी संस्कृति का उपहार है’ संपादक का कथन रिश्तों की प्रगाढ़ता के लिए प्रयासरत दिखाई देता है।

2 comments:

  1. पत्रिका बेशक बहुत शानदार है, लेकिन सबसे बड़ी समस्या है इसका नियमित ना मिलना। मैं पहले डाक से मंगाता था। लेकिन साल में ज़्यादा से ज़्यादा ८ अंक ही मिल पाते थे। शिकायत करो तो कोई फायदा नहीं। एक ही जवाब आता था, डाकघर से पता कीजिये। डाकघर को कौनसा इनका म्यूज़ियम बनाना होता है। एक-दो बार पता भी किया तो उपहास के पात्र बन गये। इसका वितरण सुधर जाये तो पत्रिका कमाल की है।
    राजेश, नई दिल्ली

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  2. बहुत ही अच्छा लिखा है आपने!

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