Friday, April 3, 2009

अनुभूति----काव्य की एक सुखद अनुभूति

पत्रिका- अनुभूति(बेव पत्रिका), अंक-30.02.2009 स्वरूप-साप्ताहिक, संपादक-पूर्णिमा वर्मन, सहयोग-दीपिका जोशी, ,मूल्य-इंटरनेट पर निःशुल्क उपलब्ध,
संपर्क- http://www.anubhuti-hindi.org/
अनुभूति बेव पर उपलब्ध एक महत्वपूर्ण काव्य प्रधान पत्रिका है। इस पर लगभग तीस हजार से अधिक कविताएं उपलब्ध हैं। समीक्षित पत्रिका को प्रति सप्ताह अपडेट किया जाता है। 30 मार्च को प्रकाशित अंक में भी कुछ समसामयिक विषयों पर आधारित कविताएं प्रकाशित की गई हैं। ख्यात गीतकार विनोद निगम का गीत ‘अभी बरसेंगे घन’ में एक और गीत के जन्म के लिए निगम घन का बरसना जरूरी मानते हैं। पुर्नपाठ के अतंर्गत पं. नरेन्द्र शर्मा की चार कविताएं कहानी कहते कहते, रथवान, पनहारिन, स्वागतम प्रभावित करती हैं। मां की ममता कहानी कहते कहते बहुत कुछ कह जाती है। कविता पनहारिन में वे जल भरने के लिए जाती हुई युवती का संुदर चित्र खींचते हैं। सरोज कुमार वर्मा की छोटी कविताओं में घर परिवार, पत्नी, बच्चे अपनी उपस्थिति का अहसास कराते हैं। श्यामल सुमन के दोहे ‘नेता पुराण’ आज की अवसरवादी राजनीति पर कटाक्ष करने में पूरी तरह कामयाब रहे हैं। पत्रिका का संयोजन, संपादन तथा प्रस्तुतिकरण आकर्षक है। लेकिन यह दुख का विषय है कि हिंदी साहित्य जगत में बेव पर उपलब्ध साहित्यिक पत्रिकाओं पर उतना ध्यान नहीं दिया जाता जितने की वे हकदार हैं। अच्छे अंक के लिए बधाई।
विशेष: चित्र तथा जानकारियां अनुभूति पत्रिका की बेव साइट से साभार

1 comment:

  1. अनुभूति पर ध्यान देने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद। आशा है भविष्य में भी कभी-कभी अभिव्यक्ति और अनुभूति पर अपने विचार प्रकट करते रहेंगे। आपके सुझाव हमारे लिए बहुमूल्य हैं। अनेक शुभकामनाएँ,

    पूर्णिमा वर्मन

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