Saturday, March 21, 2009

सृजन गाथा---गंगा से टेम्स तक हिंदी साहित्य गाथा

पत्रिका-सृजन गाथा, अंक-मार्च.09, स्वरूप-मासिक,
विशेष-इंटरनेट पर उपलब्ध, संपादक-जयप्रकाश मानस,
संपर्क- http://srijangatha.com/
सृजन गाथा इंटरनेट पर उपलब्ध एक महत्वपूर्ण साहित्यिक पत्रिका है। बेव पर उपलब्ध अन्य साहित्यिक पत्रिकाओं में यह अपना विशिष्ठ स्थान रखती है। समीक्षित अंक में विविधतापूर्ण साहित्यिक सामग्री तथा उसकी प्रस्तुति आकर्षक है। इस अंक में अखिलेश्वर पाण्डेय, कुमार मुकुल, तेजपाल सिंह, अजन्ता शर्मा तथा सुरेश कुमार पंड़ा की कविताएं संजोयी गई हैं। वरिष्ठ कवि अखिलेश्वर की कविता ‘मां की तस्वीर’ तस्वीर के फ्रेम मंे से मां की ममता का आभास पाठकों को कराने में सफल रही है। ‘और हम देखते रहेंगे’ में तेजपाल सिंह मेले, सूखी होली तथा परंपरा आदि पर के साथ ही कुछ करना भी चाहते हैं। प्रवासी कवि रेखा मैत्रा की कविता ‘होली’ तथा माह के कवि ‘विश्वनाथ प्रसाद तिवारी’ ‘पुस्तकंे’ के माध्यम से अतीत और वर्तमान के बीच की खाई को पाटने का प्रयास करते दिखाई देते हैं। डाॅ. महेश भटनागर, आनंदी सहाय शुक्ल के गीत तथा नरेन्द्र कुमार विजय, डाॅ. यशोधरा राठौर के नवगीत स्वाधीनता, संकट, समर्पण आदि नवीन विषयों का सफलतापूर्वक निर्वाहन करते हैं। श्याम सुमन, अर्चना पंड़ा तथा अशोक अंजुम के गीतों में ग्राम्य जीवन के साथ साथ मानव के लिए शुभकामनाओं का संदेश है। गैर हिंदी भाषी कविताओं के अंतर्गत सिंधी की चैदह कविताएं (विस्सी सदारंगाणी) में समय के साथ साथ चलने की कामना निहित है। हरजीत अटवाल के उपन्यास ‘रेत’ के सोलवें खण्ड को पढ़कर इस उपन्यास के कथ्य को समझा जा सकता है। ‘जोगड़ा बाट जोहता है’ बाल कथा(गिजू भाई बधेका/अनु. काशीनाथ त्रिवेदी) बच्चों के साथ साथ आम पाठक को भी पसंद आने वाली रचना है। आलेख पानी(गंगा प्रसाद बरसैया), अंगद का पांव(नंदलाल भारती) तथा राजस्थानी कहावतों पर वरिष्ठ साहित्यकार विजयदान देथा ने पठनीय तथा डाउनलोड करने योग्य रचनाएं उपलब्ध करायी है। महेश चंद्र द्विवेदी ने विस्तारपूर्वक आतंकवाद तथा उसके दुष्परिणामों पर विचार किया है। अख्तर अली, डाॅ. वीरेन्द्र सिंह यादव तथा कृष्ण कुमार यादव के लेख समसामयिक विषयों की गंभीर पड़ताल करते हैं। अंक में ‘होंठ मांगे बांसुरी’(स्नोवा वार्नो), गोमती बुआ(अखिलेश शुक्ल) तथा तूफान(खलील जिब्रान, उर्दू कहानी) सामाजिक संबंधों की व्याख्या युगीन परिवर्तनों के माध्यम से करने में सफल रही है। रामवृक्ष बेनीपुरी तथा अखिलेश्वर पाण्डेय का संस्मरण पाठक को बांधे रखने में सफल रहे हैं। वरिष्ठ कवि तथा रचनाकार अशोक वाजपेजी से और अधिक प्रश्न पूछकर उनके उत्तर जानने की आवश्यकता है। ऐसे प्रश्न जो प्राचीन भारतीय साहित्य तथा वर्तमान लेखन पद्धतियों पर विस्तृत रूप से प्रकाश डाल सके। पत्रिका के अन्य स्थायी स्तंभ, समाचार, लघुकथाएं, व्यंग्य, निबंध आदि इस पत्रिका डाउनलोड कर संग्रहित करने के लिए प्रेरित करते हैं। मूल्यवान साहित्यिक रचनाओं से युक्त प्रत्येक हिंदी प्रेमी इंटरनेट उपयोगकर्ता तक पहंुचाये जाने की आवश्यकता है।

2 comments:

  1. सृजनगाथा पर एक बार गया हूँ । अतंरजाल पर हिन्दी साहित्य की अच्छी पत्रिका है ।

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  2. आपने यह एक अच्छा चिट्ठा शुरु किया है। जानकारी के लिये धन्यवाद!

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