Thursday, March 12, 2009

हिंदी चेतना---------कनाडा से प्रकाशित साहित्यिक त्रैमासिकी

पत्रिका-हिंदी चेतना, अंक-जनवरी-मार्च.09, स्वरूप-त्रैमासिक, प्रमुख संपादक-श्याम त्रिपाठी’, संपादक-डाॅ. सुधा ओम ढीगरा, डाॅ. निर्मला आदेश, पृष्ठ-62, संपर्क- 6 Larksmere Court, Markham, Ontario L3R 3R1 email hindichetna@yahoo.ca
पत्रिका के समीक्षित अंक में सभी साहित्यिक विधाओं का सुदंर ढंग से संयोजन किया गया है। कविता , गीत, ग़ज़लों में सुधा ओम ढीगरा, रजनी भार्गव, त्रिलोकी नाथ टण्ड़न, शशि पाधा, साहिल लखनवी, प्राण शर्मा, संदीप त्यागी, भगवत शरण श्रीवास्तव, प्रो. देवेन्द्र मिश्रा, सुरेन्द्र भूटानी, कुंवर बेचैन, अमित कुमार सिंह, किरण सिंह, देवमणि पाण्डेय, निर्मल सिद्धू, महेश नंदा ‘शैदा’ की समसामयिक रचनाएं प्रभावशाली हैं। इनमें वर्तमान परिस्थितियों के प्रति चिंता का भाव दिखाई देता है। साथ ही अधिकांश अप्रवासी भारतीय कवियों की कविताएं देश प्रेम तथा भाई चारे की भावनाओं से ओतप्रोत हैं। ख्यात कथाकार तेजेन्द्र शर्मा की कहानी ‘उड़ान’ मुम्बई की पृष्टभूमि पर लिखी गई एक पठ्नीय रचना है। कहानी की पात्र ‘नीलू’ लंदन की उड़ान के माध्यम से वह सब कुछ पा लेती है जो वह पाना चाहती है। प्रख्यात साहित्यकार डाॅ. महीप सिंह से पत्रिका के संपादक श्याम त्रिपाठी की बातचीत व्यक्तिगत संवाद न होकर साहित्य का गहन चिंतन व विमर्श है। अरविंद नागले का चित्रकला संबंधी आलेख ‘वैचित्रय’ उनका कला संबंधी समर्पण दर्शाता है। कनाड़ा की प्रख्यात लेखिका इन्दरा (वडेरा) की प्रश्नोंत्तरी ‘प्रज्ञा परिशोधन’ उपयोगी जानकारी उपलब्ध कराती है। रचना श्रीवास्तव की बाल कथा ‘हलवा’, इला प्रसाद की कहानी ‘कुंठा’ तथा अतुल मिश्र का व्यंग्य हिंदी साहित्य की सर्वश्रेष्ठ रचनाएं हैं। डाॅ. राही मासूम रज़ा पर लिखा गया आलेख उनके व्यक्तित्व व कृतित्त्व पर समग्रता से विचार करता है। मुकेश निमामा का ‘यात्रा’ वृत्तांत अल्मोड़ा के साथ-साथ उसके आसपास के स्थलों की सैर कराते हुए उपयोगी जानकारी देता है। पत्रिका की चित्रकार कार्यशाला एक अनूठे ढंग की पेशकश है। नरेन्द्र कोहली का व्यंग्य ‘आत्मरक्षा का अधिकार’ तथा ओंकार त्रिवेदी का आलेख ‘शिष्टाचारः अभिवादन’ संग्रह योग्य रचनाएं हैं। पत्रिका के सभी स्थायी स्तंभ, साहित्यिक समाचार, समीक्षा, पत्र-प्रतिक्रया आदि इसे संग्रह योग्य बनाते हैं। हिंदी चेतना के इस उत्कृष्ट अंक के लिए बधाई।

2 comments:

  1. अगर आन लाइन संस्करण हो तो लिंक दीजिये । साथ ही आपने तो पढ़ने की इच्छा जागृत कर दी । समीक्षा अच्छी की आपने ।

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