Friday, February 27, 2009

हंस...हिंदी साहित्य की उड़ान (भाग-01)

पत्रिका-हंस, अंक-फरवरी.09, स्वरूप-मासिक, संपादक-राजेन्द्र यादव, कार्यकारी संपादक-संजीव, पृष्ठ-96, मूल्य-25रू.,(वार्षिक250रू), संपर्क-अक्षर प्रकाशन प्रा.लि. 2/36, अंसारी रोड़, दरियागंज, नई दिल्ली 110.002 (भारत)
हंस का समीक्षित अंक विविधतापूर्ण साहित्यिक सामग्री उपलब्ध कराता है। कथा प्रधान इस अग्रणी मासिक में पांच कहानियां विभिन्न पाठक-वर्ग की जिज्ञासा शांत करती है। बिरादर(सलिल सुधाकर), मौत के लिए एक अपील(सजिद रशीद), चांदनी सी बातें(प्रेमकुमार), चिमनी(शरद उपाध्याय) एवं डर(दलपत चैहान) विचारणीय है। सलिल सुधाकर की कहानी ‘बिरादर’ आज की जाति आधारित राजनीति को बेनकाब करती है। इस राजनीति का उपयोग सत्तालोलुप वर्ग किस ढंग से करता है उसका खुलासा करते हुए कहानी पाठक की सुप्तप्राय संवेदना को झंकृत करती है। दूसरी प्रमुख कहानी ‘चांदनी सी बातें’ में प्रेमकुमार ने बच्चों द्वारा किए जाने वाले बेतुके प्रश्नों को कथानक का आधार बनाया है। वास्तव में ये प्रश्न बेकार दिखाई देते हैं लेकिन हम कभी-कभी उन के उत्तर न देकर किस तरह से व्यवहार करते हैं यह हमारी खोखली मानसिकता का परिचय देता है। ‘चिमनी’ कहानी में धुआं उगल रही चिमनी जिससे पर्यावरण प्रदूषित होता है के बंद हो जाने पर ‘विमला’ खुश होने के बजाए दुखी हो जाती है। उसके परिवार के भरण पोषण का आधार नष्ट होत देखकर उसके पैरों तले जमीन खिसक जाती है। कथाकार ने पेट की आग बुझाने के लिए धुआं पीना स्वीकार करने की मजदूरों की पीड़ा को संक्षेप में व्यक्त किया है। कथा को कुछ ओर विस्तार देकर अंत को पर्यावरण पदूषण मुक्त वातावरण बनाने की प्रेरणा देने वाला होना चाहिए था। ‘विमला’ का प्रायश्चित करना वह स्वीकार करता है जिसकी अंतिम परिणति मृत्यु है।

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